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ट्रंप के समर्थकों में दिख रहा बदलाव, 25% दक्षिण एशियाई अमेरिकी डेमोक्रेट्स को देंगे वोट

वाशिंगटन। अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के समर्थकों के बीच राजनीतिक रुझान में बदलाव के संकेत मिले हैं। एक नए सर्वे के अनुसार, वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को वोट देने वाले दक्षिण एशियाई मूल के 25 प्रतिशत अमेरिकी मतदाता अब नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करने की योजना बना रहे हैं।

यह सर्वे भारतीय अमेरिकी समुदाय से जुड़ी संस्था इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट की ओर से कराया गया है। इसके निष्कर्ष ऐसे समय में सामने आए हैं, जब अमेरिका में तीन नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं।

800 पंजीकृत मतदाताओं पर हुआ सर्वे

सर्वे में दक्षिण एशियाई मूल के 800 पंजीकृत मतदाताओं को शामिल किया गया। इनमें 87 प्रतिशत भारतीय अमेरिकी थे, जबकि शेष मतदाता पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, श्रीलंकाई, नेपाली, भूटानी और अन्य दक्षिण एशियाई मूल के समुदायों से संबंधित थे।

सर्वे के मुताबिक, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप का समर्थन करने वाले 67 प्रतिशत मतदाताओं ने आगामी चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करने की बात कही। वहीं, 25 प्रतिशत ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की योजना जताई।

इसके विपरीत, वर्ष 2024 में कमला हैरिस को वोट देने वाले 96 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने आगामी चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने की इच्छा जताई।

महंगाई और स्वास्थ्य सेवाएं प्रमुख मुद्दे

सर्वे में मतदाताओं के सामने मौजूद प्रमुख मुद्दों को भी रेखांकित किया गया। जीवन-यापन की बढ़ती लागत को 65 प्रतिशत लोगों ने अहम मुद्दा बताया। इसके अलावा, 53 प्रतिशत ने स्वास्थ्य सेवाओं, 33 प्रतिशत ने रोजगार और वेतन तथा 28 प्रतिशत ने शिक्षा को महत्वपूर्ण मुद्दा माना।

ये आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक दबाव, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और रोजगार जैसे विषय दक्षिण एशियाई अमेरिकी मतदाताओं की चुनावी प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

चुनाव में अहम हो सकता है मतदाताओं का रुझान

अमेरिका में दक्षिण एशियाई मूल के मतदाता कई चुनावी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों पार्टियों के लिए इस समुदाय का समर्थन अहम हो सकता है।

हालांकि, सर्वे में व्यक्त की गई मतदान की मंशा वास्तविक चुनाव परिणाम की गारंटी नहीं है। तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि मतदाताओं के रुझान में बदलाव का राजनीतिक प्रभाव कितना व्यापक रहता है।

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