वाशिंगटन/नई दिल्ली (25 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और ईरान के साथ बढ़ती सैन्य तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश के भीतर कड़े विरोध और रणनीतिक चेतावनियों का सामना करना पड़ रहा है। व्हाइट हाउस के पूर्व सलाहकार और जाने-माने अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञ रॉबर्ट पेप ने ट्रंप की युद्ध नीति पर बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति इस वक्त एक “रणनीतिक जाल” में फंस चुके हैं। पेप के अनुसार, ट्रंप प्रशासन जिस ’10 दिनों के निर्णायक युद्ध’ का इंतजार कर रहा है, वह असल में एक लंबी और विनाशकारी जंग में तब्दील हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ईरान की धरती पर अपने सैनिक उतारे, तो यह एक ऐसी दलदल साबित होगी जिससे निकलना वाशिंगटन के लिए लगभग असंभव हो जाएगा।
रॉबर्ट पेप का विश्लेषण: ‘तेल का बेताज बादशाह’ बन सकता है ईरान
एनडीटीवी (NDTV) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में रॉबर्ट पेप ने युद्ध के संभावित आर्थिक और सैन्य परिणामों पर गंभीर चिंता जताई:
- लंबा खिंच सकता है युद्ध: पेप ने तर्क दिया कि ईरान के पास ऐसी भौगोलिक और सैन्य क्षमताएं हैं जो युद्ध को हफ़्तों से बढ़ाकर महीनों और सालों तक ले जा सकती हैं। यह वही स्थिति है जिससे अमेरिका ऐतिहासिक रूप से बचने की कोशिश करता रहा है।
- वैश्विक तेल संकट: उन्होंने आगाह किया कि यदि युद्ध अनियंत्रित हुआ, तो ईरान ‘तेल की दुनिया का बेताज बादशाह’ बनकर उभर सकता है। ऐसी स्थिति में तेहरान वैश्विक तेल आपूर्ति पर अपना नियंत्रण कर लेगा, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था उसके इशारों पर नाचने को मजबूर हो जाएगी।
- अमेरिका की रणनीतिक चूक: पूर्व सलाहकार का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान की प्रतिरोधक क्षमता का कम आकलन कर रहा है, जो अंततः अमेरिका को भारी पड़ सकता है।
ट्रंप की आलोचना: घरेलू स्तर पर बढ़ता दबाव
ईरान के साथ सीधे टकराव की ट्रंप की नीति को लेकर अमेरिका में दो फाड़ दिख रहे हैं:
- जाल में फंसने का डर: रॉबर्ट पेप ने कहा कि ट्रंप को लगता है कि वे जल्द ही कोई बड़ा सैन्य परिणाम हासिल कर लेंगे, लेकिन वे असल में ईरान द्वारा बिछाए गए कूटनीतिक और सैन्य जाल में फंसते जा रहे हैं।
- सैनिकों की तैनाती का विरोध: रक्षा विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग ईरान में ‘ग्राउंड इन्वेजन’ (जमीनी हमला) का विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि इससे न केवल अमेरिकी सैनिकों की जान को खतरा होगा, बल्कि मध्य-पूर्व में अमेरिका का प्रभाव हमेशा के लिए खत्म हो सकता है।
- व्हाइट हाउस में हलचल: पेप के इस खुलासे के बाद व्हाइट हाउस के भीतर भी रणनीतिक विकल्पों पर फिर से विचार करने का दबाव बढ़ गया है।





