वॉशिंगटन/मॉस्को: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बीच अमेरिकी नौसेना ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रूस से जुड़े एक विशाल तेल टैंकर को अपने कब्जे में ले लिया है। इस घटना ने वाशिंगटन और मॉस्को के बीच पहले से जारी तनाव को और अधिक गहरा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई ट्रंप की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे रूस की आर्थिक रीढ़ यानी उसके तेल व्यापार पर सीधा प्रहार करना चाहते हैं।
ऑपरेशन की पूरी जानकारी
अमेरिकी रक्षा विभाग ‘पेंटागन’ के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में की गई। अमेरिकी नौसेना के विशेष बलों ने एक खुफिया इनपुट के आधार पर रूसी हितों से जुड़े इस टैंकर को घेरा और उस पर नियंत्रण स्थापित किया।
- कारण: अमेरिका का दावा है कि यह टैंकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था और इसके जरिए होने वाली कमाई का उपयोग सैन्य गतिविधियों में किया जाना था।
- बरामदगी: टैंकर में लाखों बैरल कच्चा तेल होने की पुष्टि हुई है, जिसे अब अमेरिकी निगरानी में एक सुरक्षित बंदरगाह की ओर ले जाया जा रहा है।
ट्रंप का ‘रूस प्लान’ और आर्थिक दबाव
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वे रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने और वैश्विक बाजार पर नियंत्रण के लिए ‘अधिकतम दबाव’ (Maximum Pressure) की नीति अपनाएंगे।
- तेल व्यापार पर चोट: रूस की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से ऊर्जा निर्यात पर टिकी है। ट्रंप जानते हैं कि यदि रूसी तेल के टैंकरों को रोका जाता है, तो मॉस्को को भारी वित्तीय नुकसान होगा।
- प्रतिबंधों का सख्ती से पालन: ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी देश या पोत रूसी तेल के व्यापार में मदद करेगा, उसे अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
रूस की तीखी प्रतिक्रिया: ‘यह समुद्री डकैती है’
इस कार्रवाई पर रूस ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता ने इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन” और “आधुनिक युग की समुद्री डकैती” करार दिया है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि उसके टैंकर और चालक दल को तुरंत नहीं छोड़ा गया, तो वह भी इसका कड़ा जवाब देने के लिए स्वतंत्र है।
वैश्विक बाजार और भारत पर प्रभाव
अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है।
- तेल की कीमतें: सप्लाई बाधित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने का खतरा बढ़ गया है।
- भारत की स्थिति: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से भारी मात्रा में रियायती तेल खरीदता रहा है। अमेरिका की इस आक्रामकता के बाद भारत जैसे देशों के लिए रूसी तेल का आयात करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आगे क्या होगा?
कूटनीतिज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस कार्रवाई के जरिए रूस को बातचीत की मेज पर लाने और अपनी शर्तें मनवाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, रूस की संभावित जवाबी कार्रवाई इस विवाद को एक बड़े सैन्य गतिरोध में भी बदल सकती है।





