वाशिंगटन डीसी/नई दिल्ली: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) को ‘असंवैधानिक’ करार दिए जाने के बाद अब दुनिया भर के व्यापारिक हलकों में एक ही सवाल गूंज रहा है—उस भारी-भरकम राशि का क्या होगा जो अमेरिकी सीमा शुल्क विभाग पहले ही वसूल चुका है? आंकड़ों के अनुसार, ट्रंप के इस आदेश के लागू होने के बाद से अब तक लगभग 133 अरब डॉलर (लगभग 11 लाख करोड़ रुपये) टैरिफ के रूप में एकत्रित किए जा चुके हैं। भारत जैसे देशों के निर्यातकों, जिन्होंने अमेरिका को सामान भेजने के लिए करोड़ों रुपये का अतिरिक्त शुल्क चुकाया है, अब रिफंड की उम्मीदें लगा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह राह कानूनी पेचीदगियों से भरी हो सकती है।
133 अरब डॉलर का गणित: कहाँ है यह पैसा?
ट्रंप प्रशासन ने ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ ($IEEPA$) का उपयोग कर विभिन्न देशों से आने वाले सामान पर भारी शुल्क लगा दिया था:
- राजस्व संग्रह: अमेरिकी ट्रेजरी (खजाना) में जमा यह राशि अब कानूनी विवाद का केंद्र बन गई है। चूंकि कोर्ट ने उस मूल आधार (Executive Order) को ही अवैध घोषित कर दिया है जिसके तहत यह पैसा लिया गया था, इसलिए तकनीकी रूप से सरकार को यह पैसा अपने पास रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रह गया है।
- बजट पर असर: यदि अमेरिकी सरकार को यह पूरी राशि वापस करनी पड़ती है, तो इससे अमेरिकी बजट घाटे पर गहरा असर पड़ेगा, जो ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती होगी।
भारतीय निर्यातकों के लिए रिफंड की कितनी उम्मीद?
भारतीय कपड़ा, स्टील, आईटी हार्डवेयर और ऑटो पार्ट्स उद्योग के निर्यातकों ने इस टैरिफ के कारण भारी वित्तीय बोझ सहा है। रिफंड की प्रक्रिया निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करेगी:
- कानूनी दावों की बाढ़: भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी अदालतों में रिफंड के लिए औपचारिक दावा पेश करना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोर्ट के आदेश में ‘पूर्वव्यापी’ (Retrospective) प्रभाव का स्पष्ट उल्लेख है, तो सरकार को पैसा लौटाना ही होगा।
- ‘एस्क्रो अकाउंट’ का मामला: कई बड़ी कंपनियों ने टैरिफ का भुगतान ‘विरोध’ (Under Protest) के साथ किया था। ऐसी कंपनियों के लिए रिफंड पाना तुलनात्मक रूप से आसान हो सकता है।
- सरकारी वार्ता: भारत सरकार द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (Trade Talks) के दौरान इस 133 अरब डॉलर में से भारतीय हिस्से की वापसी के लिए दबाव बना सकती है।
क्या हैं कानूनी अड़चनें?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, रिफंड मिलना इतना सरल नहीं है:
- संप्रभु सुरक्षा (Sovereign Immunity): अमेरिकी सरकार यह तर्क दे सकती है कि एक बार वसूला गया कर वापस करना प्रशासनिक रूप से असंभव है।
- नया टैरिफ आदेश: ट्रंप ने कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद 10% का नया ‘इंपोर्ट सरचार्ज’ लगा दिया है। आशंका है कि सरकार पुराने रिफंड को नए टैक्स के साथ एडजस्ट (Set-off) करने की कोशिश कर सकती है।
निर्यातकों की प्रतिक्रिया: “न्याय की उम्मीद”
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) के अनुसार, टैरिफ हटने से भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में फिर से प्रतिस्पर्धी (Competitive) हो जाएगा। रिफंड मिलने से कंपनियों की ‘लिक्विडिटी’ (नकदी प्रवाह) में सुधार होगा, जो पिछले कुछ महीनों से बुरी तरह प्रभावित थी।




