वाशिंगटन/पेरिस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने अपरंपरागत और आक्रामक कूटनीतिक अंदाज से दुनिया को हैरत में डाल दिया है। ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अमेरिका का एक ‘प्रस्तावित नया नक्शा’ साझा किया है, जिसमें ग्रीनलैंड और कनाडा के बड़े हिस्सों को संयुक्त राज्य अमेरिका के भू-भाग के रूप में दिखाया गया है। इस नक्शे के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया है। जहाँ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी जैसे प्रमुख यूरोपीय नेता इस पर हैरानी जता रहे हैं, वहीं कनाडा और डेनमार्क (ग्रीनलैंड का संरक्षक देश) ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान बताया है। ट्रंप का यह कदम ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के उस चरम रूप को दर्शाता है, जहाँ वे वैश्विक सीमाओं को फिर से परिभाषित करने की बात कर रहे हैं।
नक्शे में क्या है खास?
ट्रंप द्वारा साझा किए गए इस विवादित नक्शे में कई चौंकाने वाले बदलाव देखे गए हैं:
- ग्रीनलैंड का विलय: नक्शे में ग्रीनलैंड को अमेरिका के 51वें राज्य के रूप में दर्शाया गया है। ट्रंप ने इसे एक “विशाल रियल एस्टेट डील” की तरह पेश किया है।
- कनाडा के संसाधनों पर नजर: कनाडा के उत्तरी और संसाधन संपन्न क्षेत्रों को अमेरिकी सीमा के भीतर दिखाया गया है।
- आर्कटिक पर नियंत्रण: इस नए नक्शे के जरिए ट्रंप ने आर्कटिक महासागर के व्यापारिक मार्गों और वहां छिपे तेल व गैस के भंडारों पर पूर्ण अमेरिकी प्रभुत्व का दावा किया है।
यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रिया: मैक्रों और मेलोनी का मौन और रोष
इस घटनाक्रम ने जी-7 (G7) के भीतर गहरी दरार पैदा कर दी है:
- इमैनुएल मैक्रों की चिंता: फ्रांस के राष्ट्रपति ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का मखौल बताया है। पेरिस से आए बयानों के अनुसार, मैक्रों इस बात से चिंतित हैं कि ट्रंप का यह व्यवहार नाटो (NATO) और वैश्विक स्थिरता को खत्म कर सकता है।
- जॉर्जिया मेलोनी का रुख: इटली की पीएम मेलोनी, जो अक्सर ट्रंप के साथ तालमेल बिठाती दिखी हैं, इस बार रक्षात्मक मुद्रा में हैं। जानकारों का मानना है कि यूरोपीय संघ के देश अब ट्रंप की इस ‘विस्तारवादी’ सोच के खिलाफ एकजुट होने की योजना बना रहे हैं।
- कनाडा की संप्रभुता पर चोट: कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे एक “हास्यास्पद कल्पना” करार देते हुए स्पष्ट किया है कि कनाडा की सीमाओं के साथ कोई समझौता नहीं होगा।
ट्रंप की इस चाल के पीछे का असली उद्देश्य?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह नक्शा महज एक ट्वीट नहीं, बल्कि एक गहरी रणनीतिक बिसात है:
- रूस और चीन को चुनौती: आर्कटिक में रूस के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ट्रंप ग्रीनलैंड और कनाडा के उत्तरी भाग को सुरक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं।
- घरेलू राजनीति: ट्रंप अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके नेतृत्व में अमेरिका फिर से एक ‘विस्तारवादी महाशक्ति’ बन रहा है।
- संसाधनों की जंग: भविष्य में होने वाली पानी और दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) की कमी को देखते हुए ट्रंप अभी से इन क्षेत्रों पर दावा ठोक रहे हैं।
निष्कर्ष: कूटनीति के नए युग की शुरुआत
ट्रंप का ‘नया नक्शा’ साझा करना यह दर्शाता है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय संबंध और अधिक तनावपूर्ण होने वाले हैं। क्या यह केवल एक राजनीतिक पैंतरा है या अमेरिका वास्तव में इन क्षेत्रों पर कब्जा करने की दिशा में सैन्य या आर्थिक कदम बढ़ाएगा, यह अभी भविष्य के गर्भ में है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन की अगली चाल पर टिकी हैं।





