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टैरिफ नीति पर ट्रंप का डबल स्टैंडर्ड: भारत पर सख्ती, चीन को 90 दिन की राहत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों से वैश्विक हलकों में बहस छेड़ दी है। चीन के साथ टकराव टालते हुए उन्होंने वहां से आयात होने वाले कई उत्पादों पर टैरिफ वसूली 90 दिन के लिए टाल दी है, लेकिन भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क तुरंत लागू करने का फैसला लिया है। इस कदम को लेकर विशेषज्ञ इसे “डबल स्टैंडर्ड” यानी दोहरे रवैये का उदाहरण बता रहे हैं।

चीन को मिली अस्थायी राहत

अमेरिका और चीन के बीच पिछले कई महीनों से व्यापारिक तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर के माल पर ऊंचे आयात शुल्क लगाए गए हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित हुई हैं। ऐसे में ट्रंप प्रशासन का यह फैसला कि टैरिफ वसूली को 90 दिन तक टाल दिया जाए, को एक “सॉफ्ट पॉलिसी मूव” के रूप में देखा जा रहा है।
इस 90 दिन की अवधि को दोनों देशों के बीच मतभेद सुलझाने का “विंडो पीरियड” माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इस दौरान अमेरिकी और चीनी प्रतिनिधि बातचीत कर सकते हैं, जिससे संभव है कि आगामी ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात में कोई समझौता हो सके।

भारत पर सख्ती

इसके विपरीत, भारत पर ट्रंप प्रशासन ने 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ बिना किसी देरी के लागू कर दिया है। यह शुल्क भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले कुछ खास श्रेणी के उत्पादों पर लगेगा। इससे भारत के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना और कठिन हो सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत पर यह सख्ती अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा है, जिसके तहत ट्रंप स्थानीय उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विदेशी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा रहे हैं।

राजनीतिक और आर्थिक संकेत

अंतरराष्ट्रीय व्यापार विश्लेषक मानते हैं कि यह फैसला अमेरिका की विदेश नीति और आर्थिक प्राथमिकताओं के बारे में कई संकेत देता है।

  • राजनीतिक संदेश: चीन को दी गई राहत से यह संकेत जाता है कि अमेरिका किसी बड़े आर्थिक टकराव से बचना चाहता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक बाजार अस्थिर हैं।
  • रणनीतिक दबाव: भारत पर सख्ती यह दर्शाती है कि ट्रंप प्रशासन भारतीय निर्यात को दबाव में लाकर अपने लिए अनुकूल शर्तें तय करवाना चाहता है।
  • चुनावी समीकरण: कुछ विशेषज्ञ इसे अमेरिकी घरेलू राजनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं, जहां ट्रंप अपने वोट बैंक को यह दिखाना चाहते हैं कि वे अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की रक्षा कर रहे हैं।

भारत की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा

भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक यह मुद्दा विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत भी उठाया जा सकता है। भारत पहले भी अमेरिकी टैरिफ नीतियों को चुनौती देता रहा है और संभव है कि इस बार भी कूटनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर जवाब दिया जाए।

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