स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सुप्रीम कोर्ट, केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच तीखी बहस का रूप ले चुका है। तमिलनाडु की पार्टी टीवीके (तामिझगा विजया कालगम) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद विपक्षी दलों ने एसआईआर प्रक्रिया में पक्षपात, मनमानी और मतदाता सूची से नाम हटाने की आशंका जताई है। वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि एसआईआर मतदाता सूची को शुद्ध करने की नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मृत मतदाताओं, दोहरी प्रविष्टियों और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना है। आयोग ने दावा किया कि अब तक नाम हटाने के खिलाफ कोई औपचारिक अपील दर्ज नहीं की गई है, जो यह साबित करता है कि प्रक्रिया में अनियमितता नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने भी अदालत में कहा कि मतदाता सूची का अद्यतन एक प्रशासनिक कार्य है और इसमें किसी राजनीतिक हस्तक्षेप का प्रश्न नहीं है।
सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि प्रक्रियागत कमियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और अदालत आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप करेगी। पीठ ने टिप्पणी की कि “संवैधानिक संस्थाएं अपना काम कर रही हैं, पर यदि अदालत संतुष्ट नहीं होती, तो आवश्यकता पड़ने पर पूरी प्रक्रिया भी रद्द की जा सकती है।”
अदालत ने गैर सरकारी संगठन ADR द्वारा दायर बिहार एसआईआर मामले की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि एसआईआर के संबंध में सभी राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए, क्योंकि प्रत्येक प्रदेश की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति अलग है। उदाहरण के रूप में पीठ ने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए बाहर रहते हैं, जबकि तमिलनाडु में मानसून और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है।
अदालत ने मामले की सुनवाई 26 और 27 नवंबर के लिए निर्धारित करते हुए निर्देश दिया कि पहले चुनाव आयोग अपना पक्ष रखेगा, उसके बाद याचिकाकर्ता बहस करेंगे। सुनवाई के दौरान तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि एसआईआर को लागू करने का समय और तरीका व्यावहारिक नहीं है और इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं को नुकसान हो सकता है।
इसी दौरान याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने भी अपनी लंबित याचिका का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने सभी राज्यों में एसआईआर लागू करवाने की मांग की थी। उपाध्याय ने कहा कि कोर्ट के नोटिस के बावजूद किसी भी राज्य ने उनके मामले में जवाब दाखिल नहीं किया, जबकि राज्य अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से कोर्ट का रुख कर रहे हैं। अदालत ने उपाध्याय की याचिका को भी 26 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।





