Sunday, November 30, 2025

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जैसलमेर में चलती बस में आग से 20 यात्रियों की दर्दनाक मौत, कई झुलसे

जैसलमेर, 15 अक्तूबर।
राजस्थान के जैसलमेर जिले में मंगलवार को एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। चलती बस में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते 20 यात्रियों की जान ले ली। कई लोग बुरी तरह झुलस गए हैं, जिनमें से 16 को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए जोधपुर रेफर किया गया। हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की भी मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब बस में आग लगी, तब उसमें करीब 40 यात्री सवार थे। कुछ ही मिनटों में पूरी बस लपटों में घिर गई, जिससे यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। कई शव बस की दीवारों से चिपके मिले, जबकि कुछ यात्रियों के शव इतने बुरी तरह झुलस गए कि उनकी पहचान संभव नहीं हो पा रही है।

जैसलमेर के कलेक्टर प्रताप सिंह ने बताया कि मृतकों की पहचान के लिए उनके परिजनों के DNA सैंपल लिए जा रहे हैं। हादसे में झुलसे यात्रियों का इलाज जोधपुर के विभिन्न अस्पतालों में जारी है।

हादसे का शिकार हुई बस केके ट्रैवल्स की बताई जा रही है। यह बस 1 अक्तूबर 2025 को रजिस्टर हुई थी, जबकि 9 अक्तूबर को इसका ऑल इंडिया परमिट जारी किया गया था। यह बस अपने चौथे फेरे पर थी। इतनी नई बस का अचानक जल जाना सुरक्षा और मेंटेनेंस मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बस में इमरजेंसी एग्जिट गेट नहीं था, और न ही विंडो तोड़ने के लिए सेफ्टी हैमर रखे गए थे। बताया जा रहा है कि बस को मॉडिफाइड किया गया था, जिसके कारण यात्रियों के फंस जाने की स्थिति और भयावह बन गई।

हादसे की वजह को लेकर कई थ्योरी सामने आई हैं। शुरू में इसे शॉर्ट सर्किट माना गया, बाद में कहा गया कि बस के एसी का कम्प्रेशर फट गया, जिससे आग फैल गई। वहीं, स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि बस की डिग्गी में पटाखे रखे गए थे, जिनमें धमाका होने के बाद आग भड़क गई।

घटना के बाद प्रशासन ने जोधपुर तक 275 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाया, ताकि घायलों को तुरंत उपचार मिल सके। सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से यह रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हालांकि, इलाज के लिए ले जाते समय एक बुजुर्ग यात्री की रास्ते में ही मौत हो गई।

फिलहाल प्रशासन ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। शुरुआती रिपोर्ट में बस ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसी की सुरक्षा में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। हादसे ने न केवल प्रदेश बल्कि देशभर में प्राइवेट ट्रांसपोर्ट वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

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