Wednesday, February 25, 2026

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जापान में सीएम योगी की ‘इन्वेस्टमेंट डिप्लोमेसी’ का शंखनाद: पहले ही दिन 11,000 करोड़ के एमओयू साइन; यूपी बनेंगे जापानी उद्योगों का नया हब

टोक्यो/लखनऊ: उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन इकोनॉमी’ बनाने के संकल्प के साथ जापान पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे ने पहले ही दिन बड़ी सफलता हासिल की है। टोक्यो में आयोजित निवेश सम्मेलन (Investment Summit) के दौरान जापानी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश के प्रति अभूतपूर्व उत्साह दिखाते हुए 11,000 करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह निवेश मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा और बुनियादी ढांचा विकास जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस दौरे से न केवल उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि हजारों की संख्या में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

प्रमुख निवेश और महत्वपूर्ण क्षेत्र

जापानी निवेशकों के साथ हुए समझौतों में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता है:

  • इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग: जापानी कंपनियों ने नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की इकाइयां स्थापित करने के लिए बड़े निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
  • क्लीन एनर्जी: उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई जापानी ऊर्जा कंपनियों ने एमओयू (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • लॉजिस्टिक्स और इंफ्रा: प्रदेश में बन रहे डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक गलियारों के पास लॉजिस्टिक पार्क विकसित करने पर सहमति बनी है।

मुख्यमंत्री योगी का संबोधन: “यूपी है निवेश का सबसे सुरक्षित गंतव्य”

जापानी उद्यमियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की बदली हुई छवि और सुविधाओं को दुनिया के सामने रखा:

  1. बेहतर कानून-व्यवस्था: सीएम ने जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपनी कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
  2. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: उन्होंने बताया कि यूपी में ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ और निवेशकों के लिए आकर्षक सब्सिडी नीतियों के कारण अब उद्योग लगाना पहले से कहीं अधिक आसान है।
  3. कनेक्टिविटी का जाल: मुख्यमंत्री ने एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट्स के बढ़ते जाल का जिक्र करते हुए कहा कि यूपी अब ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ बन चुका है, जो व्यापार के लिए बेहतरीन लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करता है।

सांस्कृतिक संबंधों से आर्थिक मजबूती तक

मुख्यमंत्री ने भारत और जापान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और बौद्ध संबंधों का भी उल्लेख किया:

  • बौद्ध सर्किट का विकास: जापानी पर्यटकों और निवेशकों को लुभाने के लिए कुशीनगर, सारनाथ और श्रावस्ती जैसे बौद्ध स्थलों पर बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की योजनाओं पर चर्चा हुई।

जापानी सिटी का प्रस्ताव: सरकार प्रदेश के कुछ चुनिंदा औद्योगिक क्षेत्रों में ‘जापानी इंडस्ट्रियल टाउनशिप’ विकसित करने पर विचार कर रही है, जहाँ जापानी कर्मचारियों के लिए विशेष सुविधाएं होंगी।

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