टोक्यो। रूस पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद मॉस्को तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने के लिए जापान में कथित जासूसी नेटवर्क सक्रिय होने का मामला सामने आया है। एक अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्ट के अनुसार, रूसी खुफिया इकाइयां जापान से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दोहरे उपयोग (Dual-use) वाली तकनीक हासिल कर रही हैं, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद पश्चिमी देशों ने कई रूसी जासूसों को अपने देशों से निष्कासित किया था। इसके बाद कुछ रूसी एजेंट जापान पहुंचे, जहां वे राजनयिकों और कारोबारी प्रतिनिधियों की आड़ में काम करने लगे।
जांच में दावा किया गया है कि टोक्यो में सक्रिय एक गुप्त रूसी सैन्य खुफिया इकाई जापानी बाजार से ऐसे उपकरणों की तलाश कर रही थी, जिनका इस्तेमाल सैन्य उत्पादन में किया जा सकता है। इनमें माइक्रोचिप, सेंसर, ट्रांसमीटर और अन्य उन्नत तकनीकी हिस्से शामिल हैं।
यूक्रेनी अधिकारियों ने भी जापान के सामने ऐसे मामलों से जुड़ी जानकारी साझा की है। उनका कहना है कि रूस प्रतिबंधों से बचने के लिए तीसरे देशों और जटिल आपूर्ति नेटवर्क का सहारा ले रहा है। कई नागरिक तकनीकी उत्पादों को सैन्य उपयोग में बदले जाने की आशंका जताई गई है।
जापान की कमजोर जासूसी विरोधी कानूनी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देश की मजबूत तकनीकी उद्योग क्षमता और अपेक्षाकृत सीमित प्रतिरोधी ढांचे के कारण विदेशी खुफिया गतिविधियों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
हाल के वर्षों में जापान में औद्योगिक गोपनीयता से जुड़े मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। एक अन्य मामले में रूसी नागरिक पर जापानी कंपनी की गोपनीय जानकारी हासिल करने का आरोप लगाया गया था, जिसमें स्थानीय कर्मचारी की मदद लेने की बात सामने आई थी।
इस खुलासे के बाद जापान में तकनीकी निर्यात नियंत्रण और विदेशी जासूसी गतिविधियों पर निगरानी मजबूत करने की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्धों में हथियारों के साथ-साथ तकनीक की आपूर्ति भी रणनीतिक महत्व रखती है।





