Sunday, February 15, 2026

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जागरण फोरम देहरादून: हिमालय की गोद में ‘विकास और विरासत’ पर महामंथन आज; पर्यावरण संरक्षण के साथ प्रगति का रोडमैप तैयार करेंगे दिग्गज विशेषज्ञ

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून आज ‘जागरण फोरम’ के एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रासंगिक सत्र की मेजबानी करने के लिए तैयार है। इस फोरम का मुख्य उद्देश्य ‘प्रकृति संरक्षण के साथ विकास’ की राह तलाशना है। पिछले कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदाओं और बढ़ते शहरीकरण के बीच, यह मंच नीति निर्माताओं, पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों को एक साथ लाएगा। विशेषज्ञ इस बात पर अपने विचार साझा करेंगे कि कैसे उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी (Ecology) वाले राज्य में बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाए, ताकि प्रकृति को कम से कम नुकसान हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।

फोरम के मुख्य एजेंडे: इन बिंदुओं पर होगा फोकस

मंच पर होने वाली चर्चा मुख्य रूप से तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी:

  • सतत बुनियादी ढांचा (Sustainable Infrastructure): ऑल वेदर रोड और चारधाम परियोजना जैसे बड़े निर्माण कार्यों के दौरान भूस्खलन को रोकने और पहाड़ों की स्थिरता बनाए रखने की तकनीक पर चर्चा होगी।
  • इको-टूरिज्म और आर्थिकी: पर्यटन को बढ़ावा देते हुए स्थानीय संस्कृति और वनों के संरक्षण को कैसे प्राथमिकता दी जाए, इस पर विशेषज्ञों की राय ली जाएगी।
  • जलवायु परिवर्तन की चुनौती: ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिघलते ग्लेशियरों और अनियमित वर्षा पैटर्न से निपटने के लिए ठोस रणनीतियों पर मंथन होगा।

प्रमुख वक्ता और पैनलिस्ट

जागरण फोरम के इस मंच पर राज्य और केंद्र स्तर के कई प्रभावशाली व्यक्तित्व शिरकत करेंगे:

  1. सरकार के प्रतिनिधि: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री राज्य की विकास योजनाओं और पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साझा करेंगे।
  2. पर्यावरणविद: पद्म भूषण से सम्मानित वैज्ञानिक और हिमालयी पारिस्थितिकी के विशेषज्ञ पहाड़ों की धारण क्षमता (Carrying Capacity) पर अपनी चिंताएं और सुझाव रखेंगे।
  3. प्रशासनिक अधिकारी: शासन के वरिष्ठ अधिकारी इस बात पर प्रकाश डालेंगे कि कैसे विकास परियोजनाओं की मंजूरी के दौरान पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह चर्चा?

उत्तराखंड इस समय एक दोराहे पर खड़ा है जहाँ एक ओर उसे कनेक्टिविटी और पर्यटन के लिए आधुनिक सड़कों की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर उसे अपनी जैव विविधता (Biodiversity) को बचाए रखना है:

  • आपदा प्रबंधन: हाल के वर्षों में जोशीमठ भू-धंसाव और केदारनाथ जैसी त्रासदियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ की एक सीमा है।
  • पलायन पर रोक: यदि विकास की राह प्रशस्त होती है, तभी पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोका जा सकता है और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सकता है।

 

‘जागरण फोरम’ केवल एक संवाद का मंच नहीं है, बल्कि यह उन समाधानों का संकलन होगा जो शासन-प्रशासन के लिए भविष्य की नीतियां बनाने में मार्गदर्शक का कार्य करेंगे। आयोजकों का मानना है कि ‘प्रकृति बनाम प्रगति’ के बजाय ‘प्रकृति के साथ प्रगति’ ही उत्तराखंड के सुनहरे भविष्य की एकमात्र कुंजी है।

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