नई दिल्ली: देश के हर ग्रामीण और शहरी परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने के संकल्प को दोहराते हुए केंद्र सरकार ने ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना के विस्तार और बजट में भारी बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया। अब ‘हर घर नल से जल’ योजना की समय सीमा को बढ़ाकर 2028 कर दिया गया है, ताकि छूटे हुए राज्यों और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में भी इस लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा किया जा सके।
बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी: 8.69 लाख करोड़ का निवेश
सरकार ने इस मिशन की गंभीरता को देखते हुए इसके वित्तीय आवंटन में भारी वृद्धि की है:
- कुल परिव्यय: जल जीवन मिशन का कुल बजट अब बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
- अतिरिक्त फंड: दूसरे चरण के लिए केंद्र सरकार ने अतिरिक्त बुनियादी ढांचे, जल शोधन संयंत्रों (Water Treatment Plants) और पाइपलाइन बिछाने के लिए विशेष फंड का प्रावधान किया है।
- रखरखाव पर जोर: इस बजट का एक बड़ा हिस्सा केवल नए कनेक्शन देने पर ही नहीं, बल्कि मौजूदा जल प्रणालियों के टिकाऊपन और रखरखाव पर भी खर्च किया जाएगा।
क्यों बढ़ी समय सीमा? (लक्ष्य अब 2028)
मूल रूप से इस योजना का लक्ष्य 2024 तक सभी घरों को कवर करना था, लेकिन कई कारणों से इसे 2028 तक विस्तारित किया गया है:
- कठिन भौगोलिक क्षेत्र: लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में पाइपलाइन बिछाना एक बड़ी चुनौती साबित हुई है।
- गुणवत्ता नियंत्रण: केवल पानी पहुँचाना ही नहीं, बल्कि BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के मानकों के अनुरूप स्वच्छ जल सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।
- शहरी विस्तार: मिशन 2.0 के तहत अब टियर-2 और टियर-3 शहरों के उन बाहरी इलाकों को भी जोड़ा जा रहा है जो अब तक इस योजना के दायरे से बाहर थे।
जल जीवन मिशन 2.0 की मुख्य विशेषताएं
- जल पुनर्भरण (Water Recharge): मिशन के इस चरण में भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और ग्रे-वॉटर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- स्मार्ट मॉनिटरिंग: प्रत्येक गाँव में पानी की आपूर्ति और शुद्धता की निगरानी के लिए IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) आधारित सेंसर लगाए जाएंगे, जिससे डेटा रियल-टाइम में डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगा।
- सामुदायिक भागीदारी: ‘पानी समितियों’ को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा, जिसमें 50% महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य होगी ताकि स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन सुचारू रहे।
अब तक की प्रगति: एक नजर में
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक देश के 75% से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुँचाया जा चुका है। गोवा, हरियाणा, पंजाब और गुजरात जैसे राज्य पहले ही 100% कवरेज का लक्ष्य हासिल कर चुके हैं। मिशन 2.0 का मुख्य फोकस अब उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों के शेष हिस्सों पर रहेगा।





