देहरादून।
उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देने वाली दो बहुप्रतीक्षित रोपवे परियोजनाओं—केदारनाथ और हेमकुंड साहिब—के निर्माण का मार्ग साफ हो गया है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) और राज्य के पर्यटन विभाग के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी सुविधा
इन दोनों रोपवे के बन जाने से लाखों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए जहां अब तक 18 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, वहीं रोपवे से यह सफर महज 30 मिनट में तय हो सकेगा। इसी तरह हेमकुंड साहिब तक की खड़ी और लंबी यात्रा भी श्रद्धालुओं के लिए आसान हो जाएगी।
दुनिया की सबसे ऊंची रोपवे परियोजनाओं में शामिल
अधिकारियों के अनुसार, केदारनाथ और हेमकुंड रोपवे परियोजनाएं दुनिया की सबसे ऊंचाई पर बनने वाली रोपवे लाइनों में शामिल होंगी। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ये न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और साहसिक गतिविधियों के लिए भी बड़ा आकर्षण बनेंगी।
रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
परियोजना से राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, साथ ही पर्यटन उद्योग में भी बड़ा इजाफा होगा। होटल, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री ने जताया आभार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एमओयू को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इन रोपवे परियोजनाओं से चारधाम और सिख तीर्थ यात्रा और भी सुगम होगी। उन्होंने केंद्र सरकार और NHLML का आभार जताते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए काम करेगी।
सुरक्षा और पर्यावरण पर रहेगा जोर
पर्यटन विभाग ने साफ किया है कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। साथ ही रोपवे की सुरक्षा और रख-रखाव के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।





