नैनीताल, 3 जून 2026: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने जमरानी नहर परियोजना से जुड़े भूमि विवाद मामले में दायर याचिका को समय से पहले (प्रीमेच्योर) मानते हुए खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में फिलहाल हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
यह याचिका जमरानी नहर परियोजना से प्रभावित भूमि और उससे जुड़े विवादों को लेकर दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से संबंधित प्रक्रियाओं में अनियमितताएं हो रही हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा गया कि परियोजना से संबंधित प्रक्रियाएं अभी प्रारंभिक या प्रगति के चरण में हैं और सभी निर्णय नियमों एवं कानून के अनुसार लिए जा रहे हैं। सरकार ने यह भी कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुए हैं, इसलिए अदालत का हस्तक्षेप समय से पहले होगा।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि वर्तमान स्थिति में याचिका पर विचार करना उचित नहीं है, क्योंकि संबंधित प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इसी आधार पर अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
जमरानी नहर परियोजना उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में सिंचाई और जल प्रबंधन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण योजना मानी जाती है। इस परियोजना को लेकर लंबे समय से भूमि अधिग्रहण और प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे मुद्दे चर्चा में रहे हैं।
अदालत के इस फैसले के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि परियोजना से जुड़े अन्य पहलुओं पर आगे नियमानुसार प्रक्रिया जारी रहेगी।
स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, हालांकि प्रशासन का कहना है कि परियोजना तय समय और नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है।





