देहरादून: उत्तराखंड समेत पूरे देश में इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च 2026, गुरुवार से शुरू होने जा रहा है। देवभूमि उत्तराखंड के विद्वान ज्योतिषियों और पंचांग गणना के अनुसार, इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों की होगी, जिसका समापन 27 मार्च को राम नवमी के साथ होगा। इसी दिन से हिंदू नववर्ष ‘विक्रम संवत 2083’ का भी आगाज होगा।
घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ कलश स्थापित किया जाता है। उत्तराखंड के स्थानीय समयानुसार घटस्थापना के लिए निम्नलिखित दो प्रमुख मुहूर्त श्रेष्ठ माने गए हैं:
- प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक। (यह समय पूजन और कलश स्थापना के लिए सर्वोत्तम है)।
- अभिजीत मुहूर्त: यदि आप सुबह स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक का समय भी अत्यंत शुभ रहेगा।
देवभूमि में विशेष उत्साह
उत्तराखंड में नवरात्रि का विशेष महत्व है। हरिद्वार के मनसा देवी और चंडी देवी मंदिरों से लेकर अल्मोड़ा के नंदा देवी और उत्तरकाशी के मां कुटeti देवी मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल माता का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसे सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है।
2026 नवरात्रि का पूरा कैलेंडर
| तिथि | दिन | देवी स्वरूप |
| 19 मार्च | गुरुवार | प्रतिपदा (घटस्थापना), मां शैलपुत्री |
| 20 मार्च | शुक्रवार | द्वितीया, मां ब्रह्मचारिणी |
| 21 मार्च | शनिवार | तृतीया, मां चंद्रघंटा |
| 22 मार्च | रविवार | चतुर्थी, मां कूष्मांडा |
| 23 मार्च | सोमवार | पंचमी, मां स्कंदमाता |
| 24 मार्च | मंगलवार | षष्ठी, मां कात्यायनी |
| 25 मार्च | बुधवार | सप्तमी, मां कालरात्रि |
| 26 मार्च | गुरुवार | अष्टमी, मां महागौरी (कन्या पूजन) |
| 27 मार्च | शुक्रवार | नवमी, मां सिद्धिदात्री (राम नवमी) |
सावधानी: इस बार नवरात्रि के शुरुआती दिनों में ‘पंचक’ और ‘खरमास’ का प्रभाव भी रहेगा, हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी पूजा पर इनका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा संपन्न कर सकते हैं।





