नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पर किसी भी तरह की अशांति का असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा। भारत ने चीन के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भी सीमा पर स्थिरता को महत्वपूर्ण बताया है।
2024 से सीमा पर सुधरे हालात
जयशंकर ने मंगलवार शाम नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भारत-चीन संबंधों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति काफी हद तक सामान्य हुई है। इसके साथ ही दोनों देशों के संबंध भी धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।
पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। वर्ष 2020 में गलवन घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद संबंधों पर गंभीर असर पड़ा। वर्ष 2024 के अंत में सीमा पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद हालात सुधारने की दिशा में प्रयास तेज हुए।
सीमा पर शांति के बिना संबंध सामान्य नहीं
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पुराना है, लेकिन इसे द्विपक्षीय संबंधों में बाधा बनने से रोकने के लिए सीमा पर शांति बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सीमा पर फिर से तनाव बढ़ता है, तो इसका असर व्यापक संबंधों पर भी दिखाई देगा।
जयशंकर ने कहा कि सीमा विवाद का पूरी तरह समाधान होना व्यापार के लिए अनिवार्य शर्त नहीं है, लेकिन सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने से जुड़े विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
चीन के साथ व्यापार घाटे पर भी चिंता
जयशंकर ने चीन के साथ आर्थिक संबंधों पर चिंता जताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन चीन के पक्ष में काफी अधिक झुका हुआ है। भारतीय कंपनियों को चीन के बाजार में पर्याप्त पहुंच नहीं मिल रही है, जबकि भारत ने चीनी कंपनियों को अवसर दिए हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि भारत-चीन संबंधों को बेहतर बनाने के लिए सीमा पर शांति के साथ आर्थिक मुद्दों का समाधान भी जरूरी होगा। भारत का रुख स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान, हितों और संवेदनशीलता के आधार पर आगे बढ़ने चाहिए।





