नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति और तकनीकी क्षेत्र में एक नया शब्द गूंज रहा है— ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica)। यह अमेरिका के नेतृत्व वाला एक ऐसा रणनीतिक गठबंधन है जिसका सीधा उद्देश्य सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर चीन के दबदबे को खत्म करना है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, भारत फरवरी 2026 में इस शक्तिशाली समूह का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विशाल कार्यशक्ति और बढ़ता डिजिटल बुनियादी ढांचा उसे चीन के सबसे मजबूत विकल्प के रूप में पेश करता है।
क्या है पैक्स सिलिका (Pax Silica)?
‘पैक्स’ का लैटिन अर्थ है ‘शांति’ और ‘सिलिका’ का अर्थ ‘सिलिकॉन’ (चिप निर्माण का मुख्य घटक) है।
- उद्देश्य: इस पहल का लक्ष्य एक ऐसा “भरोसेमंद तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र” बनाना है, जहाँ संवेदनशील तकनीक केवल लोकतांत्रिक और समान विचारधारा वाले देशों के बीच साझा की जाए।
- सदस्य देश: इसके शुरुआती सदस्यों में अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड, ताइवान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं, जो चिप निर्माण की तकनीक में अग्रणी हैं।
- चीन का मुकाबला: चूंकि दुनिया की 30% से अधिक चिप और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई पर चीन का नियंत्रण है, पैक्स सिलिका इस निर्भरता को कम करने के लिए बनाया गया है।
भारत क्यों है सबसे मुफीद बाजार?
दुनिया की नजरें भारत पर इसलिए टिकी हैं क्योंकि भारत के पास वे तीन चीजें हैं जो चीन का विकल्प बनने के लिए अनिवार्य हैं:
- विशाल टैलेंट पूल: भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर और AI इंजीनियर बेस है। पैक्स सिलिका के लिए भारत ‘बैक ऑफिस’ से ‘AI फ्रंट ऑफिस’ बनने की क्षमता रखता है।
- घरेलू मांग और पैमाना (Scale): भारत का विशाल स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार कंपनियों को स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- लोकतांत्रिक स्थिरता और भरोसा: पश्चिमी देशों के लिए भारत एक ऐसा ‘विश्वसनीय साझेदार’ है, जहाँ डेटा सुरक्षा और बौद्धिक संपदा (IP) के नियम चीन के मुकाबले अधिक पारदर्शी हैं।
भारत के लिए क्या बदल जाएगा?
पैक्स सिलिका में शामिल होने से भारत को सीधे तौर पर निम्नलिखित लाभ होंगे:
- सस्ते होंगे इलेक्ट्रॉनिक्स: जब चिप का निर्माण और असेंबली भारत में होगी, तो स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की कीमतों में भारी गिरावट आएगी।
- लाखों रोजगार: सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स (Fabs) और एआई डेटा सेंटर्स की स्थापना से उच्च तकनीक वाले लाखों रोजगार पैदा होंगे।
- रणनीतिक मजबूती: रक्षा और मिसाइल तकनीक में इस्तेमाल होने वाली उन्नत चिप्स के लिए भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
चीन के आगे भारत बनेगा ‘ग्लोबल हब’
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में भी यह संकेत दिया गया है कि भारत अब “आयात प्रतिस्थापन” (Import Substitution) से हटकर “वैश्विक मूल्य श्रृंखला” (Global Value Chain) का हिस्सा बनने की ओर बढ़ रहा है।
- चुनौती: चीन के पास दशकों का अनुभव और विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर है।
- भारत की रणनीति: ‘मेक इन इंडिया’ और ‘पीएलआई (PLI) स्कीम’ के जरिए भारत अब कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक पूरी चेन भारत में विकसित करने की कोशिश कर रहा है।
“पैक्स सिलिका केवल एक गठबंधन नहीं, बल्कि 21वीं सदी की नई आर्थिक व्यवस्था है। भारत इसमें शामिल होकर न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि दुनिया को चीन का एक विश्वसनीय विकल्प भी प्रदान करेगा।” — वरिष्ठ आर्थिक विश्लेषक





