ताइपे। ताइवान और चीन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को दावा किया कि चीन ने पिछले 24 घंटों के भीतर आठ युद्धपोत और छह सैन्य विमान ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) के आसपास तैनात किए हैं। मंत्रालय का कहना है कि यह गतिविधि ताइवान की सुरक्षा और संप्रभुता को चुनौती देने की चीन की ताजा कोशिश है।
ताइवान की निगरानी व्यवस्था अलर्ट पर
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा,
“हमने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की हर गतिविधि पर करीबी नजर रखी हुई है। ताइवान जल, तटीय क्षेत्रों और वायुसीमा में हमारी निगरानी प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है। किसी भी प्रकार की घुसपैठ या आक्रामक कार्रवाई का तुरंत जवाब दिया जाएगा।”
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, चीनी युद्धपोत और विमान ताइवान की वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) के आसपास गश्त कर रहे हैं। कुछ विमानों ने संवेदनशील दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश भी की, जिन्हें ताइवान की वायुसेना ने ट्रैक कर दूर जाने को मजबूर किया।
चीन का सैन्य दबाव बढ़ाने का प्रयास
विश्लेषकों के अनुसार, यह चीन की ओर से सैन्य दबाव और मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) की एक और रणनीति है। बीजिंग ताइवान को अपनी क्षेत्रीय सीमा का हिस्सा मानता है, जबकि ताइपे खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है।
पिछले कुछ महीनों में चीन ने बार-बार बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास और समुद्री गश्त के जरिए ताइवान पर दबाव बढ़ाया है।
ताइवान ने कहा है कि वह किसी भी उकसावे का जवाब संयम से देगा लेकिन अपनी रक्षा क्षमता से किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।
ताइवान की राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने हाल ही में कहा था कि
“हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन यदि किसी ने हमारी संप्रभुता को चुनौती दी, तो ताइवान बिना झिझक अपनी रक्षा करेगा।”
ताइवान की वायुसेना और नौसेना को उच्च सतर्कता पर रखा गया है। समुद्री गश्त बढ़ा दी गई है और मिसाइल रक्षा प्रणाली भी सक्रिय कर दी गई है।
अमेरिका ने भी स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। वॉशिंगटन ने कहा है कि वह “क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने” के लिए ताइवान के साथ खड़ा है। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन से संयम बरतने की अपील की है।
अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के अनुसार, यह गतिविधि “इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा” बन सकती है।
यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले महीने भी चीन ने 20 से अधिक युद्धपोत और करीब 60 विमान ताइवान सीमा पर भेजे थे। उस समय भी ताइवान ने चीन पर “आक्रामक सैन्य विस्तार” का आरोप लगाया था।
ताइवान का कहना है कि चीन का यह व्यवहार 2026 में संभावित आक्रमण की पूर्व तैयारी जैसा दिखता है।
एशिया-प्रशांत मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह कार्रवाई ताइवान में बढ़ते अमेरिकी समर्थन और हथियार समझौतों से असंतुष्टि का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीजिंग ताइवान को “राजनीतिक अलगाव” में रखने की रणनीति अपना रहा है, ताकि उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों की संख्या घटाई जा सके।
ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ती सैन्य हलचल से क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराता खतरा और गहरा हो गया है। एक ओर चीन अपने रुख पर अडिग है, वहीं ताइवान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह “किसी भी कीमत पर अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा।”
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि यह तनाव संवाद में बदलेगा या किसी बड़े टकराव का रूप लेगा।





