देहरादून/ऋषिकेश: उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक राहत भरी खबर है। केंद्र और राज्य सरकार ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत बन रही सुरंगों का उपयोग सड़क मार्ग के रूप में करने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस योजना के तहत, भारी ट्रैफिक या लैंडस्लाइड (भूस्खलन) के कारण हाईवे बंद होने की स्थिति में, इन सुरंगों का उपयोग वाहनों की आवाजाही के लिए किया जाएगा। इस कदम से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि चारधाम मार्ग पर लगने वाले घंटों लंबे जाम से भी स्थायी रूप से मुक्ति मिल सकेगी।
क्या है योजना और कैसे होगा क्रियान्वयन?
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का अधिकांश हिस्सा सुरंगों से होकर गुजर रहा है। नई योजना के अनुसार:
- निकासी सुरंगों (Escape Tunnels) का उपयोग: रेल लाइन के साथ-साथ समानांतर रूप से ‘एस्केप टनल’ का निर्माण किया जा रहा है। इन सुरंगों को अब इतना चौड़ा और सुविधायुक्त बनाया जाएगा कि आपात स्थिति में एंबुलेंस, बसें और अन्य छोटे वाहन आसानी से गुजर सकें।
- कनेक्टिविटी: इन सुरंगों को मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) से जोड़ने के लिए विशेष ‘एप्रोच रोड’ बनाई जाएंगी, ताकि जाम लगने पर ट्रैफिक को तुरंत टनल के अंदर डायवर्ट किया जा सके।
जाम और भूस्खलन की समस्या का स्थायी समाधान
चारधाम यात्रा के दौरान अक्सर संकरे रास्तों और पहाड़ियों से गिरने वाले मलबे के कारण मार्ग घंटों बंद रहते हैं:
- ऑल वेदर कनेक्टिविटी: रेल सुरंगों के सड़क के रूप में उपयोग से यात्रा हर मौसम में सुरक्षित हो जाएगी। सुरंगों के भीतर न तो बारिश का डर होगा और न ही भूस्खलन का खतरा।
- समय की भारी बचत: उदाहरण के तौर पर, जिस दूरी को तय करने में पहाड़ी रास्तों से 3 घंटे लगते हैं, उसे सुरंग के माध्यम से मात्र 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
- आपातकालीन सेवाएं: यह योजना विशेष रूप से चिकित्सा आपातकाल के समय जीवन रक्षक साबित होगी, क्योंकि एंबुलेंस बिना किसी बाधा के अस्पताल तक पहुँच सकेंगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुरंगों का सड़क मार्ग के रूप में उपयोग करने से पहले सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है:
- आधुनिक वेंटिलेशन: टनल के भीतर वाहनों के धुएं को बाहर निकालने के लिए अत्याधुनिक ‘जेट फैन्स’ लगाए जाएंगे।
- सीसीटीवी और लाइटिंग: पूरी सुरंग 24×7 सीसीटीवी निगरानी में रहेगी और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाएगी।
- फायर फाइटिंग सिस्टम: किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए सुरंग के भीतर हर 500 मीटर पर अग्निशमन उपकरण मौजूद रहेंगे।
रेल विकास निगम और सरकार का साझा प्रयास
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर काम कर रहे रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने इस प्रस्ताव पर तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार कर ली है।
- मुख्यमंत्री का विजन: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के विजन का हिस्सा है, जिससे उत्तराखंड में पर्यटन और कनेक्टिविटी के नए युग की शुरुआत होगी।
- आर्थिक लाभ: यात्रा सुगम होने से स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और गाइडों की आय में भी भारी वृद्धि होने की उम्मीद है।
“चारधाम यात्रा को सुरक्षित और निर्बाध बनाना हमारी प्राथमिकता है। रेल सुरंगों का वैकल्पिक सड़क मार्ग के रूप में उपयोग करना एक क्रांतिकारी कदम है, जो आपदा और ट्रैफिक जाम के समय वरदान साबित होगा।” — अपर मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन





