ऋषिकेश। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के आगाज की घड़ियाँ नजदीक आते ही देवभूमि भक्ति के रंग में सराबोर हो गई है। बुधवार को भगवान बदरी विशाल के अभिषेक के लिए प्रयुक्त होने वाले पवित्र तिल के तेल का कलश, जिसे ‘गाडू घड़ा’ कहा जाता है, धार्मिक नगरी ऋषिकेश पहुँचा। इस दौरान ऋषिकेश में आध्यात्मिक और राजनीतिक हस्तियों का जमावड़ा देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ऋषिकेश पहुँचकर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की और तेल कलश यात्रा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
नरेंद्रनगर राजदरबार से शुरू हुई सदियों पुरानी परंपरा
भगवान बदरीनाथ के कपाट खुलने से पहले होने वाली यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन रस्म है।
- पवित्र तेल की महत्ता: भगवान बदरी विशाल के निर्वाण दर्शन और प्रतिदिन के अभिषेक के लिए जिस तिल के तेल का उपयोग होता है, उसे टिहरी रियासत के नरेंद्रनगर राजदरबार में सुहागिन महिलाओं द्वारा पारंपरिक तरीके से निकाला जाता है।
- यात्रा का मार्ग: राजदरबार से पूजा-अर्चना के बाद यह कलश यात्रा ऋषिकेश पहुँची है। यहाँ से यह विभिन्न पड़ावों से होते हुए आगामी 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम पहुँचेगी, जहाँ इसी तेल से भगवान का पहला महाभिषेक संपन्न होगा।
शंकराचार्य और हरीश रावत की मुलाकात: आध्यात्मिक चर्चा
ऋषिकेश प्रवास के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मिलने पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने धर्म और संस्कृति के संरक्षण पर चर्चा की।
- श्रद्धा और राजनीति का संगम: हरीश रावत ने भगवान बदरी विशाल की गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होकर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने शंकराचार्य का आशीर्वाद लिया और चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं व धार्मिक महत्व पर संवाद किया।
- भक्तों का उत्साह: यात्रा के ऋषिकेश पहुँचने पर स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर कलश का भव्य स्वागत किया। ‘जय बदरी विशाल’ के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा।
चारधाम यात्रा 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां
इस वर्ष चारधाम यात्रा का शुभारंभ अप्रैल के उत्तरार्ध में हो रहा है:
- गंगोत्री और यमुनोत्री धाम: 19 अप्रैल 2026 (अक्षय तृतीया) को कपाट खुलेंगे।
- केदारनाथ धाम: 22 अप्रैल 2026 को सुबह विधि-विधान से कपाट खोले जाएंगे।
- बदरीनाथ धाम: 23 अप्रैल 2026 को सुबह ब्रह्ममुहूर्त में कपाट खुलने के साथ ही ‘गाडू घड़ा’ का तेल भगवान को अर्पित किया जाएगा।





