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चारधाम यात्रा: ऋषिकेश में आज से खुले ऑफलाइन पंजीकरण के द्वार, 30 काउंटरों और मोबाइल टीमों के साथ प्रशासन मुस्तैद

ऋषिकेश: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन के लिए आज, शुक्रवार सुबह 5 बजे से तीर्थयात्रियों के लिए ऑफलाइन पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। तीर्थनगरी ऋषिकेश में यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। ऑनलाइन पंजीकरण के साथ-साथ अब उन यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी जो मौके पर पहुँचकर अपना पंजीकरण कराना चाहते हैं।

ऋषिकेश में पंजीकरण केंद्रों का जाल

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के मुख्य स्थानों पर कुल 30 काउंटर क्रियाशील किए गए हैं:

  • ट्रांजिट कैंप: यहाँ सबसे अधिक 24 काउंटर स्थापित किए गए हैं, जहाँ यात्रियों के बैठने और विश्राम के लिए विशाल टेंट लगाए गए हैं।
  • ISBT ऋषिकेश: बस अड्डे पर भी 6 काउंटर संचालित किए जा रहे हैं, ताकि बस से पहुँचने वाले यात्री वहीं अपना पंजीकरण करा सकें।
  • विशेष व्यवस्था: भीड़ को नियंत्रित करने और महिलाओं व पुरुषों की सुविधा के लिए अलग-अलग काउंटरों की व्यवस्था की गई है।

भीड़ कम करने के लिए 30 मोबाइल टीमें तैनात

प्रशासन ने इस वर्ष एक नई पहल करते हुए 30 मोबाइल टीमों का गठन किया है। ये टीमें उन होटल और धर्मशालाओं में जाकर यात्रियों का पंजीकरण करेंगी जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु ठहरे हुए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य मुख्य केंद्रों (ट्रांजिट कैंप और आईएसबीटी) पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करना और यात्रियों के समय की बचत करना है।

19 अप्रैल से शुरू होगी ‘देवभूमि’ की यात्रा

इस वर्ष की चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगा।

  • पंजीकरण अनिवार्य: सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और प्रबंधन की दृष्टि से सभी यात्रियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है।
  • ऑनलाइन विकल्प: ज्ञात हो कि ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 6 मार्च से ही शुरू हो चुकी है, जिसमें अब तक लाखों श्रद्धालु अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।

हेमकुंड साहिब के लिए भी विशेष तैयारी

सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू होने पर गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब में भी पंजीकरण के लिए 4 अलग काउंटर खोले जाएंगे। गुरुवार को पूरे दिन ट्रांजिट कैंप में तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया, जहाँ यात्रियों के लिए पेयजल, बैठने की व्यवस्था और छाया के लिए बड़े टेंट लगाए गए हैं।

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