देहरादून। उत्तराखंड में आसमान से आफ़त एक बार फिर कहर बनकर टूटी। रविवार देर रात से सोमवार सुबह तक चमोली, टिहरी और रुद्रप्रयाग ज़िलों में बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। कई गाँवों में पानी और मलबा घुस आया, जिससे दो लोग लापता हो गए हैं। वहीं, खेतों में बंधे मवेशी भी सैलाब में बहकर या मलबे में दबकर मारे गए। प्रभावित इलाकों में दहशत और मातम का माहौल है।
तेज़ बारिश के बाद अचानक आया सैलाब
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, चमोली के देवाल ब्लॉक, टिहरी के कुछ गाँव और रुद्रप्रयाग की घाटियों में देर रात अचानक बारिश का ज़ोर बढ़ा और देखते ही देखते पहाड़ों से मलबा और पानी नीचे उतर आया। कई जगहों पर नाले उफान पर आ गए, जिससे गाँवों में पानी घुस गया। मकानों, दुकानों और खेतों को नुकसान पहुँचा है।
दो लोग लापता, खोज जारी
चमोली जिले में बादल फटने के बाद दो लोग लापता बताए जा रहे हैं। एसडीआरएफ और पुलिस की टीम राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है। स्थानीय लोग भी प्रशासन की मदद से लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।
मवेशी और संपत्ति का नुकसान
रुद्रप्रयाग और टिहरी में कई ग्रामीणों ने बताया कि खेतों और आंगनों में बंधे मवेशी तेज़ पानी और मलबे की चपेट में आ गए। अब तक दर्जनों पशुओं के दबने या बहने की खबर है। साथ ही कच्चे मकान और कृषि भूमि भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है।
राहत-बचाव अभियान जारी
आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। भारी मशीनें मलबा हटाने के काम में लगाई गई हैं ताकि सड़कों को दोबारा खोला जा सके। बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है, जिसे दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने ली स्थिति की समीक्षा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना की जानकारी मिलने पर अधिकारियों को तुरंत राहत और बचाव कार्य तेज़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद और मुआवज़ा उपलब्ध कराया जाएगा।
पहाड़ों पर संकट बरकरार
लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन ने उत्तराखंड के पहाड़ी ज़िलों में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण कार्यों ने प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और बढ़ा दिया है।





