देहरादून। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में 27 अक्टूबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। चुनावी वर्ष में धामी सरकार के मौजूदा कार्यकाल के अंतिम सत्र में प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। सरकार जहां विपक्ष के सवालों का जवाब देने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस ने जनसमस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
27 और 28 अक्टूबर को चलेगा सत्र
विधानसभा का दो दिवसीय सत्र 27 अक्टूबर को सुबह 11 बजे शुरू होगा। सत्र के दौरान सरकार अनुपूरक बजट पेश करने के साथ विभिन्न विधेयकों और विभागों तथा निगमों की वार्षिक प्रतिवेदन रिपोर्ट सदन के पटल पर रखेगी।
विधानसभा सचिवालय को अब तक 31 विधायकों की ओर से 426 प्रश्न प्राप्त हुए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा है कि सचिवालय सत्र के सुचारु संचालन के लिए तैयार है। उनका प्रयास रहेगा कि उपलब्ध समय में पक्ष और विपक्ष के विधायकों को अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर मिले।
विपक्ष के सवालों का जवाब देने को तैयार सरकार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सकारात्मक और विकास से जुड़े मुद्दों का सरकार मजबूती से जवाब देगी। उन्होंने विपक्ष से तथ्यपूर्ण विषय सदन में उठाने की अपील की है।
सरकार की ओर से अनुपूरक बजट और विभिन्न विभागों के कामकाज से जुड़े विषयों की तैयारी की जा रही है। चुनावी वर्ष होने के कारण सत्र में राज्य के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है।
कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं विधायक प्रीतम सिंह ने सत्र की अवधि केवल दो दिन रखने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में जनसमस्याओं की कमी नहीं है, लेकिन कम समय के कारण विपक्ष को सभी महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सवालों से बचना चाहती है। कांग्रेस सदन में प्रदेश की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है।
चुनावी वर्ष में बढ़ेगा राजनीतिक तापमान
गैरसैंण में होने वाला यह सत्र आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास जैसे मुद्दे सदन में चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
अब देखना होगा कि दो दिनों की सीमित कार्यवाही में सरकार और विपक्ष कितने मुद्दों पर चर्चा कर पाते हैं और जनता से जुड़े सवालों पर क्या निर्णय सामने आते हैं।





