वाशिंगटन। गूगल ने अपने एआई चिप्स को पहली बार अंतरिक्ष में भेजकर एक अहम तकनीकी प्रयोग शुरू किया है। कंपनी का प्रोजेक्ट सनकैचर यह पता लगाने के लिए है कि क्या भविष्य में बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंप्यूटिंग को अंतरिक्ष में स्थापित किया जा सकता है। इसके लिए गूगल ने एक प्रोटोटाइप सैटेलाइट को कक्षा में पहुंचाया है।
यह सैटेलाइट SpaceX के Transporter-18 मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजा गया। इसे गूगल ने सैटेलाइट कंपनी Planet के साथ मिलकर तैयार किया है। सैटेलाइट में गूगल के Tensor Processing Units (TPUs) लगाए गए हैं। कंपनी इन चिप्स के जरिए यह जांचेगी कि वे अंतरिक्ष में लॉन्च के दौरान होने वाले कंपन, विकिरण और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं या नहीं।
अंतरिक्ष में क्यों भेजे जा रहे AI चिप्स?
गूगल का मानना है कि पृथ्वी की कक्षा में मौजूद सैटेलाइट लंबे समय तक सूर्य की रोशनी प्राप्त कर सकते हैं। कंपनी के अनुसार, लो अर्थ ऑर्बिट में सौर ऊर्जा की उपलब्धता पृथ्वी की तुलना में कई गुना अधिक हो सकती है। ऐसे में भविष्य में अंतरिक्ष आधारित AI कंप्यूटिंग के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा उपलब्ध कराने की संभावना तलाशी जा रही है।
गर्मी और विकिरण बड़ी चुनौती
अंतरिक्ष में AI चिप्स के संचालन के सामने कई तकनीकी चुनौतियां हैं। इनमें विकिरण से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को होने वाला नुकसान और चिप्स से पैदा होने वाली गर्मी को बाहर निकालना प्रमुख हैं। अंतरिक्ष में हवा नहीं होने के कारण सामान्य एयर-कूलिंग तकनीक काम नहीं करती। गूगल इसके लिए हीट पाइप और रेडिएटर आधारित कूलिंग सिस्टम का परीक्षण कर रहा है।
2027 में दो सैटेलाइट का परीक्षण
मौजूदा मिशन का उद्देश्य व्यावसायिक डेटा सेंटर चलाना नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में AI हार्डवेयर के प्रदर्शन से जुड़ा डेटा जुटाना है। गूगल की योजना 2027 में दो सैटेलाइट को कक्षा में भेजकर उनके बीच हाई-बैंडविड्थ लेजर संचार का परीक्षण करने की भी है। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में कई सैटेलाइट को जोड़कर बड़े AI कंप्यूटिंग सिस्टम की संभावनाएं तलाशना है।
गूगल ने इसे लंबे समय का शोध प्रोजेक्ट बताया है। फिलहाल अंतरिक्ष आधारित AI डेटा सेंटर को व्यावसायिक रूप से शुरू करने से पहले लागत, संचार, कूलिंग और हार्डवेयर की विश्वसनीयता जैसी कई चुनौतियों का समाधान करना बाकी है।





