नई दिल्ली: भारत आज अपनी औपनिवेशिक विरासत को पीछे छोड़ते हुए स्वाभिमान के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश की राजधानी में नवनिर्मित ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ का भव्य उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना ब्रिटिश शासन के दौरान बने उन ढांचों और प्रतीकों का विकल्प है जो पिछले 125 वर्षों से भारतीय प्रशासन पर एक ‘छाया’ की तरह मौजूद थे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, ये नए संस्थान न केवल आधुनिक भारत की जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि ‘पंच प्राण’ के संकल्प के तहत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का प्रतीक भी बनेंगे।
सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन: क्या है इनकी विशेषता?
ये नए भवन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और भारतीय संस्कृति व आधुनिकता का बेजोड़ संगम हैं:
- सेवा तीर्थ: यह परिसर मुख्य रूप से लोक सेवा और जन कल्याण को समर्पित होगा। यहाँ से सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।
- कर्तव्य भवन: यह भवन प्रशासनिक कार्यों और नीति निर्धारण का नया केंद्र बनेगा। इसका नाम ‘कर्तव्य’ रखने के पीछे का उद्देश्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को उनके संवैधानिक दायित्वों की याद दिलाना है।
- स्वदेशी वास्तुकला: इन भवनों के निर्माण में देश के विभिन्न हिस्सों से आए पत्थरों और सामग्री का उपयोग किया गया है, जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की तस्वीर पेश करते हैं।
125 साल पुरानी परंपरा का अंत
ब्रिटिश काल में बने कई भवन आज भी लुटियंस दिल्ली की पहचान हैं, लेकिन वे उस समय के शासन की जरूरतों के हिसाब से बनाए गए थे:
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति: पीएम मोदी का मानना है कि नए भारत के पास अपने स्वयं के प्रतीक होने चाहिए। यह कदम राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ करने की कड़ी का ही एक हिस्सा है।
- आधुनिक बुनियादी ढांचा: पुराने भवनों में जगह की कमी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां थीं। नए परिसर पूरी तरह से भूकंपरोधी, ऊर्जा-कुशल और ‘ग्रीन बिल्डिंग’ मानकों पर आधारित हैं।
- डिजिटल इंडिया का संगम: इन भवनों में उन्नत तकनीक, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और पेपरलेस वर्किंग कल्चर को बढ़ावा देने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
प्रधानमंत्री का संबोधन और विजन
उद्घाटन समारोह के बाद प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित भी करेंगे:
- विकसित भारत @ 2047: उम्मीद है कि पीएम मोदी इस अवसर पर वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के मार्ग पर इन संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करेंगे।
- जनता को समर्पित: समारोह के बाद इन परिसरों के कुछ हिस्सों को जनता के लिए भी खोला जा सकता है, ताकि लोग नए भारत की इस भव्यता के साक्षी बन सकें।





