गांधीनगर। राजधानी गांधीनगर में सोमवार को प्रशासन ने बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाते हुए साबरमती नदी के किनारे बने करीब 700 अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला दिया। नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में यह कार्रवाई की।
नदी किनारे पसर रहा था अतिक्रमण
साबरमती नदी के तट पर लंबे समय से झुग्गियां, पक्के मकान और अस्थायी दुकानें बन गई थीं। प्रशासन का कहना है कि इन निर्माणों से न केवल नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा था, बल्कि प्रदूषण और अवैध कब्जों की समस्या भी बढ़ रही थी। मानसून के दौरान बाढ़ जैसी स्थिति में यह अतिक्रमण स्थानीय लोगों के लिए जानलेवा खतरा बन सकता था।
सुबह से शुरू हुआ अभियान
सुबह करीब नौ बजे भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच नगर निगम और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। प्रभावित लोगों को पहले ही नोटिस देकर अतिक्रमण खाली करने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद कई परिवार मौके पर मौजूद रहे। बाद में बुलडोजर और जेसीबी मशीनों से एक-एक कर अवैध ढांचे ढहाए गए।
विरोध भी हुआ, लेकिन कार्रवाई जारी
कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने विरोध जताने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें शांत कराया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कदम सार्वजनिक हित और नदी के पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया गया है।
पुनर्वास की मांग
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि जिन परिवारों की झुग्गियां और मकान तोड़े गए हैं, उनके पुनर्वास की उचित व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक हटाए जाने से सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।
प्रशासन का पक्ष
अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेश और मास्टर प्लान के तहत की गई है। पुनर्वास के लिए सरकार की ओर से योजनाएं पहले से मौजूद हैं और पात्र लोगों को इसका लाभ दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
इस बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई ने जहां नदी किनारे फैले अतिक्रमण को खत्म कर दिया है, वहीं विस्थापित लोगों की समस्या को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।





