Saturday, February 14, 2026

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गाज़ा संघर्ष पर ऑस्ट्रेलियाई संसद में गरमाया माहौल, इस्राइल पर व्यापक प्रतिबंध की मांग तेज़

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की संसद के नए सत्र की शुरुआत मंगलवार को उस वक्त हुई जब देश के भीतर और बाहर गाज़ा युद्ध को लेकर तीखी बहस और विरोध का माहौल गर्म है। संसद भवन के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने एकत्र होकर इस्राइल के खिलाफ पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की और “गाज़ा को न्याय दो” जैसे नारों के साथ विरोध दर्ज कराया।

सत्र की औपचारिक शुरुआत, लेकिन गाज़ा की गूंज हर ओर

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की अगुवाई वाली लेबर पार्टी संसद में भारी बहुमत के साथ लौटी है। हालांकि नया सत्र परंपरागत रूप से औपचारिक होता है, लेकिन इस बार गाज़ा संघर्ष की छाया संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह दिखाई दी।

संसद भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने इस्राइल पर पूर्ण राजनयिक और आर्थिक प्रतिबंधों की मांग की। प्रदर्शनकारियों में से करीब 15 लोगों ने संसद की ऊपरी गैलरी में घुसने की कोशिश की, जिन्हें सुरक्षा अधिकारियों ने समय रहते रोक लिया।

ग्रीन पार्टी की सख्त प्रतिक्रिया

ग्रीन पार्टी की उप नेता सीनेटर मेहरीन फारुकी ने संसद के भीतर गाज़ा भूखा है, केवल शब्द नहीं – प्रतिबंध लगाओ’ लिखी तख्ती लहराकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। यह दृश्य संसद के औपचारिक माहौल में असाधारण था, लेकिन गाज़ा मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।

अब तक केवल सीमित प्रतिबंध, प्रदर्शनकारियों की मांग – व्यापक कार्रवाई

ऑस्ट्रेलिया सरकार ने पहले ही इस्राइली मंत्रियों इतामार बेन गविर और बेजेल स्मोट्रिच पर वित्तीय और यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि, अब विपक्ष और नागरिक समाज से इस्राइल के खिलाफ राज्य-स्तरीय व्यापक प्रतिबंधों की मांग तेज़ हो गई है।

सरकार का अब तक का सबसे कड़ा बयान

गाज़ा संघर्ष को लेकर ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में 27 देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें युद्ध को तुरंत समाप्त करने की अपील की गई है। गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने इसे “अब तक का सबसे सख्त बयान” बताते हुए कहा, जो कुछ गाज़ा में हो रहा है, वह असहनीय है। बंधकों की रिहाई ज़रूरी है, लेकिन युद्ध का अंत भी उतना ही अनिवार्य है।”

 

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