नई दिल्ली/लखनऊ: अंधविश्वास और जानकारी के अभाव में उपजा डर कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकता है। हाल ही में एक दर्दनाक मामला सामने आया है जहाँ एक युवक ने पालतू कुत्ते के काटने (Dog Bite) के बाद रेबीज होने के डर से आत्महत्या कर ली। युवक को अंदेशा था कि उसे लाइलाज रेबीज हो गया है और उसकी मौत तड़प-तड़प कर होगी। इस घटना ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को झकझोर कर रख दिया है। प्रमुख डॉक्टरों ने इस पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए ’10-डे ऑब्जर्वेशन रूल’ (10 दिनों का अवलोकन नियम) और रेबीज से जुड़े उन मेडिकल फैक्ट्स को साझा किया है, जिनकी जानकारी हर नागरिक के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
क्या है ’10 दिन’ का वैज्ञानिक सच? डॉक्टर की राय
देश के जाने-माने संक्रामक रोग विशेषज्ञों के अनुसार, रेबीज को लेकर समाज में कई भ्रांतियां हैं। डॉक्टर ने वैज्ञानिक तथ्यों को स्पष्ट करते हुए बताया:
- कुत्ते की निगरानी: यदि किसी कुत्ते ने काटा है, तो सबसे पहले उस कुत्ते पर 10 दिनों तक नजर रखनी चाहिए।
- वायरस का प्रसार: वैज्ञानिक तथ्य यह है कि रेबीज का वायरस कुत्ते की लार में केवल तभी आता है जब वह स्वयं मौत के करीब हो। यदि कुत्ता काटने के 10 दिनों के भीतर मर जाता है या उसमें पागलपन के लक्षण दिखते हैं, तभी रेबीज का खतरा माना जाता है।
- अगर कुत्ता जीवित है: यदि काटने के 10 दिन बाद भी कुत्ता स्वस्थ है और सामान्य रूप से खाना-पीना कर रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि काटने के समय उसके थूक में रेबीज का वायरस मौजूद नहीं था। ऐसे में इंसान को रेबीज होने का खतरा शून्य होता है।
डॉग बाइट के तुरंत बाद क्या करें? ‘फर्स्ट एड’ है जरूरी
डॉक्टरों ने बताया कि डरने के बजाय सही उपचार की प्रक्रिया अपनाना जरूरी है:
- घाव की सफाई: कुत्ते के काटने के तुरंत बाद घाव को बहते हुए पानी और साबुन (जैसे डेटॉल या साधारण साबुन) से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। यह वायरस के लोड को 90% तक कम कर देता है।
- टीकाकरण (Vaccination): बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) लगवानी चाहिए। यदि घाव गहरा है, तो ‘रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन’ (RIG) का इंजेक्शन भी जरूरी होता है।
- पट्टी न बांधें: डॉक्टर सलाह देते हैं कि कुत्ते के काटने वाले घाव पर कभी भी टांके नहीं लगवाने चाहिए और न ही उसे कसकर पट्टी से ढंकना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य और जागरूकता की कमी
इस दुखद घटना ने मानसिक स्वास्थ्य के पहलू को भी उजागर किया है:
- फोबिया और एंग्जायटी: कई बार लोग ‘साइनोफोबिया’ (कुत्तों का डर) या रेबीज के खौफ में इतने घिर जाते हैं कि वे गलत कदम उठा लेते हैं।
- इलाज संभव है, डर नहीं: विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज 100% जानलेवा है, लेकिन समय पर टीका लगवाने से यह 100% बचाव योग्य (Preventable) भी है।





