हल्द्वानी। कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली के बाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान में शुद्धीकरण कराए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद मैदान में धार्मिक अनुष्ठान कराए जाने पर कांग्रेस ने इसे दलित समाज और उसके नेता का अपमान बताया है।
रिपोर्ट के अनुसार, खरगे की रैली के बाद श्री रामलीला मैदान में शुद्धीकरण की प्रक्रिया कराई गई। इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। कांग्रेस का कहना है कि खरगे देश के वरिष्ठ नेता हैं और दलित समाज से आते हैं। ऐसे में उनकी रैली के बाद सार्वजनिक स्थल का शुद्धीकरण कराया जाना सामाजिक भेदभाव की मानसिकता को दर्शाता है।
कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा और उससे जुड़े लोगों पर निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर उसके कार्यक्रम के बाद धार्मिक शुद्धीकरण कराया जाना स्वीकार्य नहीं है। इससे सामाजिक समरसता पर भी सवाल उठते हैं।
वहीं, शुद्धीकरण कराने वाले पक्ष की ओर से इसे धार्मिक आस्था और परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है। उनका कहना है कि मैदान में धार्मिक अनुष्ठान कराना किसी व्यक्ति या समुदाय का अपमान करने के उद्देश्य से नहीं किया गया। हालांकि, इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में जातीय और सामाजिक मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
कांग्रेस ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर सभी राजनीतिक दलों और समुदायों के कार्यक्रम होते हैं। ऐसे में किसी नेता के कार्यक्रम के बाद इस तरह की कार्रवाई सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।





