नई दिल्ली (18 मार्च, 2026): मध्य प्रदेश के इंदौर में इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग के दौरान हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की सुरक्षा और उनके तकनीकी मानकों को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में ईवी से जुड़े हादसों की संख्या में पिछले तीन वर्षों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है, जिससे उपभोक्ताओं के मन में ‘ग्रीन मोबिलिटी’ को लेकर डर पैदा हो गया है।
आंकड़ों की जुबानी: डराने वाली तस्वीर
ईवी सेक्टर की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ हादसों का ग्राफ भी ऊपर गया है:
- रोजाना 25 हादसे: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) और परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार, देश भर में छोटे-बड़े मिलाकर औसतन 25 हादसे प्रतिदिन इलेक्ट्रिक वाहनों (टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और कार) से जुड़े दर्ज किए जा रहे हैं।
- तीन वर्षों का रिकॉर्ड: पिछले 36 महीनों में ईवी में आग लगने की घटनाओं में 400% से अधिक का उछाल देखा गया है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच हजारों ऐसी घटनाएं सामने आईं जिनमें वाहन खड़े-खड़े या चार्जिंग के दौरान जलकर खाक हो गए।
- मौतों का सिलसिला: केवल आग लगने की घटनाओं के कारण पिछले तीन वर्षों में देशभर में 150 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
ईवी में आग लगने की मुख्य वजहें: विशेषज्ञों की राय
ऑटोमोबाइल इंजीनियरों और विशेषज्ञों के अनुसार, ईवी में आग लगने के पीछे कई तकनीकी और व्यवहारिक कारण होते हैं:
- लिथियम-आयन बैटरी का ‘थर्मल रनवे’: जब बैटरी के भीतर का तापमान अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है, तो यह ‘थर्मल रनवे’ की स्थिति पैदा करता है। इससे बैटरी में विस्फोट हो जाता है और आग तेजी से फैलती है।
- घटिया क्वालिटी के सेल्स और बीएमएस (BMS): लागत कम करने के लिए कई कंपनियां कम गुणवत्ता वाले चीनी सेल्स और दोषपूर्ण ‘बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम’ (BMS) का उपयोग करती हैं, जो ओवरचार्जिंग या वोल्टेज फ्लक्चुएशन को नहीं रोक पाते।
- भारतीय जलवायु और अत्यधिक गर्मी: भारत का तापमान गर्मियों में अक्सर 45°C के पार चला जाता है। अधिकांश ईवी बैटरियां यूरोपीय मानकों पर आधारित होती हैं, जो भारतीय गर्मी को सहन करने के लिए पर्याप्त रूप से अनुकूलित नहीं हैं।
- घरेलू वायरिंग और अनसेफ चार्जिंग: इंदौर जैसी घटनाओं में देखा गया है कि लोग मानक चार्जर के बजाय साधारण पावर सॉकेट्स का उपयोग करते हैं। इससे तारों के गर्म होने (Overheating) और शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है।
इंदौर अग्निकांड: एक चेतावनी
इंदौर के बंगाली चौराहे पर हुआ हादसा एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह है। यहाँ केवल कार ही नहीं जली, बल्कि पास रखे गैस सिलिंडरों में विस्फोट होने से पूरा घर ढह गया। इस घटना ने सिद्ध कर दिया है कि ईवी की सुरक्षा केवल सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घरों के भीतर भी एक संभावित खतरा बन सकती है यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न किया जाए।
सरकार का रुख: कड़े होंगे मानक
बढ़ते हादसों को देखते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं:
- नया परीक्षण मानक (AIS 156): सरकार ने बैटरी टेस्टिंग के लिए ‘अमेंडमेंट-3’ लागू किया है, जिसमें थर्मल प्रोटेक्शन और सेल-टू-सेल गैप पर कड़े नियम बनाए गए हैं।
भारी जुर्माना और रिकॉल: आग लगने की घटनाओं के लिए जिम्मेदार कंपनियों पर करोड़ों का जुर्माना और उनके सभी वाहनों को बाजार से वापस (Recall) बुलाने के आदेश दिए जा रहे हैं।





