नई दिल्ली: ब्रह्मांड की अद्भुत घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए एक रोमांचक खबर है। खगोल वैज्ञानिकों ने भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में लगने वाले आगामी पूर्ण चंद्रग्रहण (Total Lunar Eclipse) की सटीक तिथि और समय की घोषणा कर दी है। इस बार का ग्रहण विशेष होने वाला है क्योंकि चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा और एक गहरे लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। भारत के पूर्वी राज्यों में यह खगोलीय घटना सबसे पहले और स्पष्ट रूप से दिखाई देगी, जबकि पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में आंशिक ग्रहण का अनुभव होगा।
भारत में कब और कहाँ देगा दिखाई? समय सारणी
खगोल विज्ञान केंद्र के अनुसार, चंद्रग्रहण की शुरुआत और समाप्ति का समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार इस प्रकार रहेगा:
- तारीख: यह ग्रहण आगामी 14 मार्च, 2026 (शनिवार) को लगने जा रहा है।
- ग्रहण की शुरुआत: आंशिक ग्रहण शाम 05:15 PM पर शुरू होगा।
- पूर्ण ग्रहण (ब्लड मून): चंद्रमा पूरी तरह लाल रंग में शाम 06:20 PM से दिखना शुरू होगा।
- सबसे स्पष्ट दृश्य: कोलकाता, गुवाहाटी, ईटानगर और कोहिमा जैसे पूर्वी शहरों में पूर्ण चंद्रग्रहण का सबसे बेहतर नजारा दिखेगा क्योंकि यहाँ चंद्रोदय जल्दी होता है।
- बाकी भारत: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और देहरादून जैसे शहरों में लोग शाम को चंद्रोदय के समय आंशिक रूप से लाल चंद्रमा देख पाएंगे।
कितनी देर रहेगा ‘ब्लड मून’ का असर?
इस बार पूर्णता (Totality) की अवधि काफी लंबी रहने वाली है, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगी:
- पूर्णता की अवधि: चंद्रमा लगभग 1 घंटे 16 मिनट तक पूरी तरह से पृथ्वी की घनी छाया (Umbra) में रहेगा, जिससे ‘ब्लड मून’ का असर लंबे समय तक दिखेगा।
- रंग का रहस्य: वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर आने वाली सूरज की लाल रोशनी जब चंद्रमा पर पड़ती है, तो वह लाल दिखाई देने लगता है। प्रदूषण और बादलों की स्थिति के आधार पर यह रंग गहरा ईंट जैसा या चमकीला नारंगी हो सकता है।
- कुल समय: स्पर्श से लेकर मोक्ष (शुरुआत से अंत) तक पूरी प्रक्रिया लगभग 3 घंटे 40 मिनट की होगी।
क्या है वैज्ञानिक कारण और सावधानियां?
चंद्रग्रहण एक पूर्णतः सुरक्षित खगोलीय घटना है, जिसे देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती:
- कैसे होता है ग्रहण: जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी इस प्रकार आ जाती है कि उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्रग्रहण होता है।
- सुरक्षित अवलोकन: सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्रग्रहण को आप अपनी नग्न आँखों (Naked Eyes) से सीधे देख सकते हैं। बेहतर अनुभव के लिए दूरबीन (Binoculars) या छोटे टेलिस्कोप का उपयोग किया जा सकता है।
- फोटोग्राफी: खगोल प्रेमी इस दौरान ‘ब्लड मून’ की शानदार तस्वीरें खींच सकते हैं, क्योंकि चंद्रमा सामान्य से थोड़ा बड़ा और रंगीन दिखाई देता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं: सूतक काल
भारत में ग्रहण का धार्मिक महत्व भी होता है, जिसे देखते हुए मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे:
- सूतक का समय: ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों और भोजन बनाने/खाने को लेकर कई परंपराएं प्रचलित हैं।
- मंदिरों में विशेष पूजा: ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों का शुद्धिकरण किया जाएगा और गंगा स्नान की परंपरा निभाई जाएगी।





