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कोटद्वार: फर्नीचर बाजार में धधकी भीषण आग, पांच दुकानें जलकर खाक; लाखों के नुकसान से व्यापारियों में कोहराम

कोटद्वार। जनपद पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में रविवार को एक भीषण अग्निकांड ने भारी तबाही मचाई। गाड़ीघाट मालगोदाम रोड पर स्थित फर्नीचर की दुकानों में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिसकी चपेट में आकर पांच दुकानें पूरी तरह जलकर खाक हो गई हैं। दमकल विभाग की कई गाड़ियों को आग पर काबू पाने में घंटों मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन तब तक व्यापारियों का लाखों रुपये का कीमती सामान राख के ढेर में तब्दील हो चुका था।

बंद दुकान से उठता धुंआ बना तबाही का संकेत

घटना रविवार दोपहर करीब 12 बजे की है, जब बाजार में सामान्य चहल-पहल थी।

  • ऐसे लगी आग: मालगोदाम रोड से गुजर रहे राहगीरों ने एक बंद फर्नीचर की दुकान के भीतर से काला धुंआ निकलता देखा। लोगों ने तत्काल इसकी सूचना दुकान स्वामी को दी।
  • शटर खोलते ही भड़की लपटें: जैसे ही दुकान का शटर खोला गया, ऑक्सीजन मिलते ही भीतर सुलग रही आग ने प्रचंड रूप ले लिया। दुकान के अंदर रखा तैयार फर्नीचर और कच्ची लकड़ी धू-धू कर जलने लगी।

हवा के झोंकों ने एक के बाद एक पांच दुकानों को घेरा

दोपहर के समय चल रही तेज हवाओं ने आग को बुझाने के बजाय उसे और भड़काने का काम किया।

  • पड़ोसी दुकानें भी चपेट में: फर्नीचर की जिस दुकान में आग लगी थी, वह काफी सघन क्षेत्र में थी। देखते ही देखते आग की लपटों ने एक ही कतार में स्थित चार अन्य फर्नीचर की दुकानों को भी अपनी आगोश में ले लिया।
  • मचा हड़कंप: बाजार में आग फैलते ही व्यापारियों और स्थानीय लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने अपने स्तर पर पानी और रेत डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी भयावह थी कि पास जाना भी नामुमकिन हो गया था।

दमकल की तीन गाड़ियों ने घंटों बाद पाया काबू

सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुँची, लेकिन आग पर काबू पाना किसी चुनौती से कम नहीं था।

  • विफल रहे शुरुआती प्रयास: आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दमकल की एक के बाद एक तीन गाड़ियों का पानी खत्म हो गया, फिर भी आग शांत नहीं हुई। दमकल कर्मियों को कई घंटों तक आग बुझाने के लिए जूझना पड़ा।
  • भारी नुकसान: प्राथमिक अनुमान के अनुसार, इस अग्निकांड में तैयार सोफे, बेड, अलमारियां और कीमती मशीनें जल गई हैं, जिससे दुकान स्वामियों को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति हुई है।

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