नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी संकल्प लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘सेवा तीर्थ’ केवल एक प्रतीकात्मक स्थान या शक्ति प्रदर्शन का केंद्र नहीं होगा, बल्कि यह राष्ट्र के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के सशक्तीकरण (Empowerment) का मुख्य आधार बनेगा। कैबिनेट ने इस संकल्प के माध्यम से शासन (Governance) के प्रति अपने दृष्टिकोण को पूरी तरह सेवा-उन्मुख बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र की सफलता का एकमात्र पैमाना ‘जन-सेवा’ होना चाहिए।
‘सेवा तीर्थ’ का मूल दर्शन: सेवा ही परम धर्म
कैबिनेट ने ‘सेवा तीर्थ’ की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए इसे तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित बताया है:
- सशक्तीकरण, न कि शक्ति का दिखावा: सरकार का मानना है कि सत्ता का उपयोग अपनी शक्ति दिखाने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों को सामर्थ्यवान बनाने के लिए किया जाना चाहिए। ‘सेवा तीर्थ’ ऐसे नवाचारों का केंद्र बनेगा जो आम आदमी की समस्याओं का समाधान करेंगे।
- अंतिम व्यक्ति तक पहुँच (Antyodaya): इस संकल्प के तहत, सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव और बाधा के देश के सबसे गरीब और वंचित व्यक्ति तक पहुँचाना सुनिश्चित किया जाएगा।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: ‘सेवा तीर्थ’ को एक ऐसे मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है जहाँ सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
कैबिनेट बैठक के प्रमुख बिंदु: सेवा के लिए नई कार्यशैली
प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट सहयोगियों के सामने भविष्य की कार्ययोजना के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश रखे:
- सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव: मंत्रियों को निर्देश दिया गया कि वे केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि ‘सेवा तीर्थ’ की भावना के साथ सीधे जनता के बीच जाएं और उनकी समस्याओं का जमीनी फीडबैक लें।
- समर्पण का भाव: संकल्प पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्रशासन में हर निर्णय ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘सेवा भाव’ के साथ लिया जाना चाहिए। ‘सेवा तीर्थ’ इसी समर्पण की ऊर्जा का स्रोत बनेगा।
- सकारात्मक समाचार साझा करना: बैठक की शुरुआत मंत्रियों द्वारा अपने क्षेत्रों की उन खबरों को साझा करने से हुई, जिनसे समाज में सकारात्मक बदलाव आया है। इसे ‘सेवा तीर्थ’ की संस्कृति का अभिन्न अंग बनाया गया है।
सशक्तीकरण के लिए तकनीकी और मानवीय पहल
कैबिनेट ने यह भी तय किया कि ‘सेवा तीर्थ’ के माध्यम से डिजिटल इंडिया और मानवीय संवेदनाओं का मेल किया जाएगा:
- सुगम सेवा पोर्टल: नागरिकों को एक ही स्थान पर सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक तकनीकी ढांचे को और मजबूत किया जाएगा।
- फीडबैक मैकेनिज्म: जनता सीधे ‘सेवा तीर्थ’ के माध्यम से अपनी राय और शिकायतों को दर्ज करा सकेगी, जिसका निपटारा समयबद्ध तरीके से होगा।





