नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत के बाद देशभर में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के वन विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
जानकारी के अनुसार यह वायरस मुख्य रूप से कुत्तों में फैलता है, लेकिन इसका असर बाघ, तेंदुआ और अन्य जंगली जानवरों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित आवारा कुत्तों के संपर्क में आने से वन्यजीवों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। जंगलों के आसपास रहने वाले आवारा कुत्तों के वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य जांच की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी वन्यजीव में कमजोरी, बुखार या असामान्य व्यवहार दिखाई देने पर तुरंत जांच कराई जाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक कैनाइन डिस्टेंपर एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो जानवरों के श्वसन और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। समय पर टीकाकरण ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने भी राज्यों से सतर्कता बढ़ाने और नियमित मॉनिटरिंग की मांग की है, ताकि बाघों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों को इस संक्रमण से बचाया जा सके।





