अल्मोड़ा/नैनीताल: उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल में होली का त्योहार केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का जीवंत उत्सव है। इस वर्ष कुमाऊं की पहाड़ियों में ‘मल्याल’ की नशामुक्त होली परंपरा विशेष चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जहां देश के कई हिस्सों में होली पर हुड़दंग और नशे का बोलबाला रहता है, वहीं कुमाऊं के ग्रामीण अंचलों में सौहार्द, शुद्धता और गीत-संगीत के माध्यम से इस पर्व को मनाया जा रहा है। विशेषकर महिलाओं द्वारा रचे जा रहे ‘स्वांग’ (हास्य-व्यंग्य नाटिकाएं) और बैठकी होली की शास्त्रीय गूँज ने इस उत्सव को अलौकिक बना दिया है।
मल्याल परंपरा: नशे को नकार, संस्कृति को अपनाकर
कुमाऊं के कई गांवों में सदियों पुरानी ‘मल्याल’ परंपरा आज भी अपनी शुद्धता के साथ जीवित है:
- शुद्धता का प्रतीक: ‘मल्याल’ का अर्थ है वह समूह जो मर्यादा और शुचिता के साथ होली का गायन करता है। इसमें नशीले पदार्थों के सेवन को पूरी तरह वर्जित माना गया है।
- सांस्कृतिक समर्पण: इस परंपरा के तहत होली गाने वाले दल (होल्यार) गांव-गांव जाकर आशीर्वाद बांटते हैं। बुजुर्गों का कहना है कि नशामुक्त रहकर ही देवी-देवताओं की स्तुति और होली के रागों का सही आनंद लिया जा सकता है।
- सामाजिक संदेश: यह परंपरा नई पीढ़ी को यह संदेश दे रही है कि बिना किसी दुर्व्यसन के भी त्योहारों का भरपूर आनंद लिया जा सकता है।
महिलाओं का ‘स्वांग’: हास्य-व्यंग्य और कला का संगम
कुमाऊंनी होली की सबसे दिलचस्प कड़ी महिलाओं द्वारा किया जाने वाला ‘स्वांग’ है:
- बहुरूपिया कला: महिलाएं विभिन्न वेशभूषा धारण कर पौराणिक पात्रों, सामाजिक कुरीतियों या वर्तमान राजनीतिक स्थितियों पर कटाक्ष करती हैं।
- स्त्री शक्ति का उल्लास: पुरुषों की ‘खड़ी होली’ की तरह ही महिलाएं आंगन में एकत्र होकर ढोलक और मंजीरों की थाप पर पारंपरिक होली गाती हैं। स्वांग के माध्यम से वे कठिन पहाड़ी जीवन के बीच हंसी-ठिठोली के पल चुराती हैं।
- स्वांग के विषय: अक्सर महिलाएं देवर-भाभी, सास-बहू या सरकारी व्यवस्था पर मजाकिया नाटक पेश करती हैं, जिससे पूरा गांव ठहाकों से गूँज उठता है।
बैठकी और खड़ी होली की शास्त्रीय गूँज
कुमाऊं की होली अपनी संगीतबद्धता के लिए दुनिया भर में जानी जाती है:
- रागों पर आधारित: बैठकी होली में पीलू, खमाज, काफी और धमार जैसे शास्त्रीय रागों का प्रयोग होता है। शाम ढलते ही हारमोनियम और तबले की संगत पर होली की महफिलें सजने लगती हैं।
- सांस्कृतिक विरासत: खड़ी होली में सफेद कुर्ता-पाजामा और सिर पर गांधी टोपी पहने होल्यार एक घेरे में नृत्य करते हुए गाते हैं, जो एकता और भाईचारे का प्रतीक है।





