तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शapi थरूर को लेकर एक बार फिर तलवारें खिंच गई हैं। केरल कांग्रेस में जारी खींचतान अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। हाल ही में पार्टी के एक अन्य प्रभावशाली सांसद ने थरूर के खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें निशाने पर लिया है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि थरूर पार्टी की विचारधारा का कोई ‘बड़ा हिस्सा’ नहीं हैं। इस बयान के बाद एक बार फिर कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक एकता और गुटबाजी को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
‘वो पार्टी का हिस्सा हैं, लेकिन विचारधारा का नहीं’
कांग्रेस के एक अन्य लोकसभा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर या निजी बातचीत के दौरान (जैसा कि सूत्रों द्वारा दावा किया गया है) थरूर की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने टिप्पणी की कि शशि थरूर केवल अपनी व्यक्तिगत छवि और बौद्धिक विमर्श तक सीमित हैं और पार्टी की जमीनी राजनीति या सांगठनिक ढांचे में उनका योगदान नगण्य है। सांसद ने कड़े लहजे में कहा, “थरूर कांग्रेस का हिस्सा जरूर हैं, लेकिन वे उस बड़े राजनीतिक और वैचारिक आधार का हिस्सा नहीं हैं जिस पर हमारी पार्टी टिकी है।”
विवाद की मुख्य वजह: थरूर की ‘स्वतंत्र’ कार्यशैली
थरूर के खिलाफ पार्टी के भीतर असंतोष का यह पहला मामला नहीं है। विवाद के पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:
- स्थानीय नेतृत्व से टकराव: केरल के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का मानना है कि थरूर अक्सर राज्य इकाई को विश्वास में लिए बिना अपने कार्यक्रमों की घोषणा कर देते हैं।
- बयानों में भिन्नता: कई बार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर थरूर के बयान पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग रहे हैं, जिससे कांग्रेस को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है।
- बौद्धिक बनाम जमीनी राजनीति: पार्टी का एक धड़ा उन्हें ‘अभिजात्य’ (Elite) नेता मानता है, जिनका जुड़ाव आम कार्यकर्ताओं से कम है।
केरल कांग्रेस के नेताओं ने भी साधी चुप्पी
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के भीतर भी थरूर के प्रति नाराजगी साफ देखी जा रही है। हाल ही में हुए कुछ कार्यक्रमों में थरूर की गैर-मौजूदगी या उन्हें आमंत्रित न किए जाने पर विवाद हुआ था। राज्य के कुछ नेताओं का तर्क है कि थरूर की लोकप्रियता सोशल मीडिया तक सीमित है, जबकि चुनाव जीतने के लिए कार्यकर्ताओं के पसीने की जरूरत होती है।
थरूर समर्थकों का पलटवार
दूसरी ओर, शशि थरूर के समर्थकों और पार्टी के कुछ युवा नेताओं का कहना है कि थरूर कांग्रेस का एक आधुनिक चेहरा हैं जो युवाओं और शहरी मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने की क्षमता रखते हैं। समर्थकों का मानना है कि पार्टी के भीतर कुछ लोग थरूर की बढ़ती लोकप्रियता और उनकी स्वतंत्र सोच से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, इसलिए उन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं।
आगामी चुनावों पर पड़ सकता है असर
कांग्रेस आलाकमान ने फिलहाल इस आंतरिक बयानबाजी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस कलह को जल्द नहीं सुलझाया गया, तो आने वाले स्थानीय और आम चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, विशेषकर केरल में जहाँ कांग्रेस का प्रदर्शन हमेशा मजबूत रहा है।





