Thursday, February 5, 2026

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कर्नाटक विधानसभा में टकराव: कांग्रेस सरकार ने ‘वीबी जी राम जी’ योजना को रद्द करने का प्रस्ताव किया पेश; केंद्र से मनरेगा को पूरी शक्ति के साथ बहाल करने की मांग

बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा का बजट सत्र आज भारी हंगामे और राजनीतिक खींचतान का गवाह बना। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने सदन में पिछली सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वीबी जी राम जी’ (विद्यार्थी भरोसा योजना) को आधिकारिक रूप से रद्द करने का प्रस्ताव पेश किया। सरकार का तर्क है कि यह योजना वित्तीय रूप से व्यावहारिक नहीं है और इसके स्थान पर नई जनकल्याणकारी गारंटी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही, सत्तापक्ष ने एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मनरेगा (MGNREGA) के बजट में कटौती को रोकने और इसे राज्य में पूरी क्षमता के साथ फिर से लागू करने की मांग की है।

‘वीबी जी राम जी’ योजना को रद्द करने के पीछे का तर्क

कांग्रेस सरकार ने इस योजना को बंद करने के लिए संसाधनों के पुनर्वितरण (Resource Redistribution) को मुख्य कारण बताया है:

  • वित्तीय प्रबंधन: राज्य सरकार के अनुसार, पिछली भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के लिए बजटीय प्रावधान पर्याप्त नहीं थे।
  • नई गारंटियों पर जोर: सरकार का कहना है कि वे ‘शक्ति’, ‘गृह लक्ष्मी’ और ‘युवा निधि’ जैसी अपनी पांच मुख्य गारंटियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, जिससे सीधे तौर पर अधिक लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
  • विपक्ष का विरोध: भाजपा और जेडीएस के विधायकों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे ‘युवा विरोधी’ कदम बताया और सदन से वॉकआउट किया।

मनरेगा को लेकर केंद्र पर साधा निशाना

विधानसभा में चर्चा के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री ने मनरेगा को लेकर एक विस्तृत प्रस्ताव रखा:

  1. फंड की मांग: कर्नाटक सरकार ने आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा मनरेगा फंड में की गई देरी के कारण राज्य के लाखों मजदूरों का भुगतान रुका हुआ है।
  2. काम के दिनों में वृद्धि: सूखे और ग्रामीण संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से मांग की है कि काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 150 दिन किया जाए।
  3. रोजगार गारंटी की वापसी: कांग्रेस ने प्रस्ताव में कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में वापस लाना अनिवार्य है, ताकि पलायन रोका जा सके।

सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस

प्रस्ताव पेश किए जाने के दौरान सदन में भारी शोर-शराबा देखा गया:

  • सिद्धारमैया का बयान: मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पिछली सरकार की ‘गलत प्राथमिकताओं’ को सुधार रही है और ग्रामीण गरीबों के हक की लड़ाई केंद्र से जारी रखेगी।
  • विपक्ष का पलटवार: विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए केंद्र पर दोष मढ़ रही है और पुरानी योजनाओं को द्वेषपूर्ण राजनीति के तहत बंद कर रही है।

प्रशासनिक प्रभाव

योजना रद्द होने के प्रस्ताव के बाद अब शिक्षा और समाज कल्याण विभाग उन छात्रों के लिए वैकल्पिक छात्रवृत्ति योजनाओं पर विचार कर रहे हैं जो इस योजना से लाभान्वित होने वाले थे। वहीं, मनरेगा पर पारित प्रस्ताव को औपचारिक रूप से केंद्र सरकार को विचारार्थ भेजा जाएगा।

“हम राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करते हुए सीधे जनता के हाथ में पैसा पहुँचाना चाहते हैं। ‘वीबी जी राम जी’ जैसी योजनाओं के बजाय हमारी गारंटी योजनाएं अधिक प्रभावी हैं। साथ ही, मनरेगा ग्रामीण भारत की लाइफलाइन है और हम इसके बजट की बहाली के लिए हर स्तर पर मांग उठाएंगे।” — कर्नाटक सरकार के वरिष्ठ मंत्री

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