नई दिल्ली। भारत अब वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने जा रहा है। भारत और कंबोडिया के बीच हुए समझौते के तहत भारतीय बाघों को कंबोडिया भेजा जाएगा, जहां वर्ष 2016 में बाघों को आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित कर दिया गया था।
समझौते के अनुसार भारत प्रारंभिक चरण में छह रॉयल बंगाल टाइगर कंबोडिया भेजेगा। इनमें दो नर और चार मादा बाघ शामिल होंगे। इन बाघों को कंबोडिया के कार्डामम नेशनल पार्क में बसाया जाएगा, जहां पिछले कई वर्षों से उनके लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार आधार और सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जा रही है।
भारत का राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) पिछले कुछ वर्षों से कंबोडिया के अधिकारियों के साथ मिलकर इस परियोजना पर कार्य कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने पार्क में बाघों के लिए आवश्यक प्राकृतिक परिस्थितियों और शिकार प्रजातियों की उपलब्धता का आकलन किया है। सकारात्मक रिपोर्ट मिलने के बाद इस योजना को आगे बढ़ाया गया है।
यह पहल केवल बाघों के स्थानांतरण तक सीमित नहीं रहेगी। भारत कंबोडिया को बाघ संरक्षण, निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन, शिकार रोकने की रणनीति और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े तकनीकी प्रशिक्षण में भी सहयोग देगा। दोनों देशों का उद्देश्य कंबोडिया में बाघों की स्थायी और सुरक्षित आबादी विकसित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण साबित हो सकती है। भारत ने पिछले वर्षों में बाघ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है और अब अपने अनुभव का लाभ अन्य देशों को भी उपलब्ध करा रहा है।
कंबोडिया में वर्ष 2007 के बाद जंगलों में कोई जंगली बाघ नहीं देखा गया था। इसके बाद वर्ष 2016 में देश ने बाघों को कार्यात्मक रूप से विलुप्त घोषित कर दिया था। अब भारतीय बाघों की मदद से वहां फिर से बाघों की मौजूदगी स्थापित करने की तैयारी की जा रही है, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।





