जेद्दा। इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने खाड़ी क्षेत्र के देशों पर हुए ईरानी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है। ओआईसी ने सभी पक्षों से संयम बरतने और सैन्य तनाव को बढ़ने से रोकने की अपील की है।
ओआईसी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। संगठन ने प्रभावित खाड़ी देशों के साथ एकजुटता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान पर जोर दिया।
यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों को निशाना बनाया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की ओर से कतर और संयुक्त अरब अमीरात समेत कुछ खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिसके बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
खाड़ी देशों ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ कार्रवाई बताया है। कई देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए कदम उठाने की मांग की है।
तनाव का एक प्रमुख केंद्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होरमुज जलडमरूमध्य भी बना हुआ है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टकराव जारी रहा तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रही हैं।
ओआईसी ने अपने बयान में क्षेत्रीय शांति, संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई है। संगठन का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और विकास के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।





