ऑस्ट्रेलिया की संसद में एक अप्रत्याशित घटना ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी, जब एक महिला सांसद बुर्का पहनकर सदन में पहुंच गईं। यह कदम उन्होंने कथित रूप से धार्मिक स्वतंत्रता और पहनावे की आज़ादी को लेकर जारी बहस के संदर्भ में उठाया। हालांकि, संसद के नियमों का हवाला देते हुए उन्हें तुरंत सदन में प्रवेश से रोक दिया गया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई।
सूत्रों के अनुसार, सांसद ने बुर्का पहनकर सदन में प्रवेश की कोशिश करते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया कि धार्मिक पहचान के आधार पर किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक संस्थानों में भेदभाव नहीं झेलना चाहिए। लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल और पहचान से जुड़ी नियमावली का उल्लंघन होने के कारण संसद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें दरवाज़े पर ही रोक दिया।
घटना के सामने आते ही संसद में इस मुद्दे पर तनाव बढ़ गया। कुछ सदस्यों ने सांसद के कदम को ‘अनावश्यक राजनीतिक नाटक’ करार दिया, जबकि कुछ अन्य ने इसे सांस्कृतिक विविधता के समर्थन में उठाया गया साहसिक कदम बताया। हालांकि, सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और पहचान सत्यापन से जुड़े नियमों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
बाद में, संसद प्रशासन ने उनकी कार्रवाई को नियमों के विरुद्ध बताते हुए चेतावनी जारी की। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी सांसद को सदन में प्रवेश करते समय पहचान स्पष्ट रूप से दिखाने वाले निर्देशों का पालन अनिवार्य है।
इस घटना के बाद देश में बुर्का और पहचान संबंधी बहस दोबारा तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और आम जनता की ओर से भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आ रही है।





