भारत द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है—कार्रवाई में तुर्किए (तुर्की) के दो सैन्य ऑपरेटिव्स भी मारे गए हैं, जो कथित रूप से पाकिस्तान की सैन्य मदद कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक, तुर्किए ने न केवल पाकिस्तान को 350 से अधिक ड्रोन की आपूर्ति की, बल्कि अपने ऑपरेटर्स भी भेजे जो भारतीय सीमाओं पर हमलों की योजना में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किए के सलाहकारों ने पाकिस्तानी सैन्य बलों को समन्वित ड्रोन हमलों में सहयोग दिया। खासतौर पर भारत के अग्रिम मोर्चों और लॉजिस्टिक काफिलों को निशाना बनाने के लिए बेरक्तार TB2 और वायआईएचए जैसे ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि हाल के वर्षों में पाकिस्तान और तुर्किए के बीच सैन्य सहयोग तेजी से बढ़ा है। तुर्किए ने न केवल उन्नत सैन्य ड्रोन और तकनीकें पाकिस्तान को दी हैं, बल्कि उसकी सेना को प्रशिक्षण भी दिया है।
बताया गया है कि सात और आठ मई की रात, पाकिस्तान ने भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के पास करीब 300 से 400 ड्रोन हमलों की कोशिश की थी। हालांकि भारत की जवाबी कार्रवाई में इन हमलों को विफल कर दिया गया।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया, “ड्रोन मलबे की फॉरेंसिक जांच से प्रारंभिक संकेत मिले हैं कि ये तुर्किए के असिसगार्ड ‘सोंगर’ ड्रोन हैं।” इससे तुर्किए की प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी की पुष्टि होती है।
यह घटनाक्रम भारत की रणनीतिक सुरक्षा में तुर्किए की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है और वैश्विक स्तर पर इस गठजोड़ पर निगाहें टिकी हैं।





