नई दिल्ली। अमेरिकी टेक कंपनी एपल ने ऑफलाइन मैसेजिंग एप्लिकेशन बिटचैट को भारत के ऐप स्टोर से हटा दिया है। यह कार्रवाई इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की मांग के बाद की गई है। बिटचैट के डेवलपर और ट्विटर (अब एक्स) के सह-संस्थापक जैक डोर्सी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी।
डोर्सी ने इस संबंध में एपल की ओर से भेजे गए नोटिस का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। नोटिस में कहा गया कि ऐप में ऐसी सामग्री मौजूद है, जिसे भारत में अवैध माना गया है और जो एपल के ऐप स्टोर की समीक्षा संबंधी दिशानिर्देशों का पालन नहीं करती।
आईटी एक्ट की धारा 69ए के तहत कार्रवाई
जैक डोर्सी के अनुसार, भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत ऐप को हटाने की मांग की थी। इस धारा के तहत केंद्र सरकार निर्धारित परिस्थितियों में ऑनलाइन सामग्री तक पहुंच को अवरुद्ध करने का आदेश दे सकती है।
एपल ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया कि बिटचैट अन्य देशों के ऐप स्टोर पर उपलब्ध रहेगा। हालांकि, भारत में इसका टेस्टफ्लाइट संस्करण भी परीक्षण के लिए उपलब्ध नहीं होगा। कंपनी ने डेवलपर को मामले में आगे की जानकारी के लिए संबंधित सरकारी मंत्रालय से संपर्क करने की सलाह दी।
क्या है बिटचैट और कैसे करता है काम?
बिटचैट एक विकेंद्रीकृत मैसेजिंग एप्लिकेशन है, जिसे इंटरनेट कनेक्शन या मोबाइल नेटवर्क के बिना संदेश भेजने के लिए तैयार किया गया है। यह ब्लूटूथ लो एनर्जी (BLE) आधारित मेश नेटवर्किंग तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसके माध्यम से आसपास मौजूद डिवाइस एक-दूसरे से जुड़कर संदेशों को आगे पहुंचा सकते हैं।
इस ऐप की खासियत यह है कि इसके इस्तेमाल के लिए फोन नंबर या किसी केंद्रीय सर्वर पर निर्भरता जरूरी नहीं होती। आपात परिस्थितियों और नेटवर्क की अनुपलब्धता वाले क्षेत्रों में इस तरह की तकनीक उपयोगी हो सकती है।
पहले भी जांच के दायरे में आया था ऐप
बिटचैट इससे पहले भी भारत में सरकारी जांच के दायरे में आ चुका है। हालांकि, ताजा कार्रवाई में किन विशिष्ट सामग्री या गतिविधियों को अवैध माना गया, इसकी विस्तृत जानकारी एपल के नोटिस में नहीं दी गई है।
इस कार्रवाई के बाद भारत में ऐप की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जबकि अन्य देशों में इसे उपलब्ध रखने की बात कही गई है।





