ऋषिकेश, संवाददाता: तीर्थनगरी ऋषिकेश में सुचारू यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के दावों के बीच पुलिस द्वारा लागू किया गया नया ट्रैफिक प्लान शुक्रवार को धरातल पर पूरी तरह बेअसर साबित हुआ। वीकेंड शुरू होते ही शहर में वाहनों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा, जिसके आगे पुलिस की सारी तैयारियाँ धरी की धरी रह गईं। परिणामस्वरूप, शहर के प्रमुख मार्गों पर भयंकर जाम लग गया, जिससे स्थानीय निवासियों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भीषण गर्मी में भारी फजीहत झेलनी पड़ी।
दो घंटे में तय हुआ चंद मिनटों का सफर
जाम की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को हरिद्वार से सुबह 11 बजे ऋषिकेश के लिए चली बसें रेंग-रेंग कर दोपहर लगभग एक बजे नटराज चौक पहुँच सकीं। अमूमन आधे घंटे से भी कम समय में तय होने वाले इस सफर में यात्रियों को दो घंटे से अधिक का समय लगा। बस में सवार यात्री, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग, भीषण गर्मी और उमस के बीच जाम में फंसकर बेहाल नजर आए।
इन इलाकों में रही सबसे खराब स्थिति
शहर के प्रवेश द्वार श्यामपुर में सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो दिन चढ़ने के साथ और लंबी होती गईं। इसके अलावा, ढालवाला से लेकर मुनिकीरेती तक का पूरा क्षेत्र पूरी तरह जाम की चपेट में रहा। ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के पहिए थमे रहे और लोग अपनी गाड़ियों में कैद होकर रह गए।
पुलिस के प्रयास नाकाफी, वाहनों का दबाव बरकरार
हालाँकि, यातायात सुचारू करने के लिए विभिन्न चौकों और संवेदनशील मोड़ों पर भारी पुलिस बल तैनात था। पुलिसकर्मी लगातार धूप में खड़े होकर वाहनों को आगे भेजने और जाम खुलवाने के जी-तोड़ प्रयास करते नजर आए। लेकिन, मुनिकीरेती और ढालवाला की ओर पीछे से आने वाले वाहनों का दबाव इतना अधिक था कि पुलिस के सारे प्रयास नाकाफी साबित हुए। एक तरफ से यातायात सुचारू करने की कोशिश होती, तो दूसरी तरफ वाहनों का रेला लग जाता। पुलिस के नए यातायात प्लान के बावजूद इस कदर जाम लगने से प्रशासन की दूरदर्शिता और तैयारियों पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।





