नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ती मांग के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण कदम तेज कर दिए हैं। देश में बिजली खपत निरंतर बढ़ रही है, जिसके चलते कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयात में वृद्धि की गई है। साथ ही, दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एनटीपीसी (NTPC) ने परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में नई तैयारियां शुरू कर दी हैं।
ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की मांग पिछले महीनों में काफी बढ़ी है। घरेलू उत्पादन में वृद्धि के बावजूद, कुछ राज्यों में आपूर्ति अंतर को भरने के लिए केंद्र सरकार ने आयात बढ़ाने की अनुमति दी है।
- बिजली की बढ़ती मांग के चलते कई कोयला-आधारित संयंत्रों की खपत क्षमता बढ़ गई है।
- आयातित कोयले का उपयोग रणनीतिक रूप से उन पावर प्लांट्स में किया जा रहा है जहां स्टॉक का स्तर कम हो रहा था।
- ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में कोयला आयात बढ़ाना आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखने के लिए आवश्यक कदम है।
भारत की सबसे बड़ी विद्युत उत्पादन कंपनी एनटीपीसी अब अपनी ऊर्जा उत्पादन क्षमता का दायरा बढ़ाने के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आक्रामक विस्तार की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में परमाणु आधारित बिजली उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाना है।
- एनटीपीसी ने कई संभावित स्थानों पर नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करनेके लिए प्रारंभिक अध्ययन शुरू कर दिए हैं।
- कंपनी ने परमाणु ऊर्जा निगम (NPCIL) के साथ साझेदारी मॉडल पर भी काम बढ़ाया है, ताकि बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
- अधिकारियों के अनुसार, परमाणु ऊर्जा को भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत स्तंभ माना जा रहा है, क्योंकि यह स्वच्छ, स्थायी और उच्च स्थिरता वाली ऊर्जा उपलब्ध कराती है।
सरकार का लक्ष्य ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर देश को लंबे समय तक ऊर्जा संकट से सुरक्षित रखना है।
सौर, पवन और जल विद्युत के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा को भी प्रमुख विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि—
- कोयला अभी भी देश के ऊर्जा ढांचे का बड़ा हिस्सा है, इसलिए इसकी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
- वहीं, परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाना भारत को स्थायी और स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की ओर ले जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में समग्र रणनीति
केंद्र सरकार का मानना है कि बढ़ती आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के चलते बिजली की खपत लगातार बढ़ने वाली है। ऐसे में कोयला, नवीकरणीय और परमाणु ऊर्जा—तीनों क्षेत्रों में समानांतर प्रगति अनिवार्य है।
ऊर्जा मंत्रालय ने साफ किया है कि देश किसी भी हालत में बिजली संकट का सामना नहीं करना चाहता, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सभी स्तरों पर त्वरित और दीर्घकालिक रणनीतिक फैसले लिए जा रहे हैं।
भारतीय ऊर्जा बाजार में हो रहे ये बदलाव संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को मजबूती से पूरा करेगा, बल्कि स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करेगा।





