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उदयपुर में मौत की रफ्तार: सवारियों से लदी ओवरलोड जीप अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिरी; 3 यात्रियों की मौके पर मौत, कई घायल

उदयपुर: राजस्थान के उदयपुर जिले के पहाड़ी और घुमावदार रास्तों पर एक बार फिर ओवरलोडिंग (क्षमता से अधिक सवारी) जानलेवा साबित हुई। यहाँ सवारियों से खचाखच भरी एक जीप अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जीप की छत और पीछे के हिस्से पर भी लोग लटके हुए थे, जिसके कारण मोड़ पर चालक वाहन का संतुलन नहीं रख सका। चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुँचे ग्रामीणों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को मलबे से बाहर निकाला और अस्पताल पहुँचाया।

हादसे का घटनाक्रम: मोड़ पर बेकाबू हुआ वाहन

प्रारंभिक जांच और चश्मदीदों के अनुसार, दुर्घटना के पीछे मुख्य कारण लापरवाही को माना जा रहा है:

  • क्षमता से दुगुनी सवारियां: बताया जा रहा है कि जीप में बैठने की क्षमता से कहीं अधिक लोग सवार थे। ओवरलोड होने के कारण गाड़ी ढलान और मोड़ पर पूरी तरह बेकाबू हो गई।
  • अनियंत्रित होकर पलटी: एक तीखे मोड़ को काटते समय जीप सड़क से नीचे उतर गई और सीधे खाई में समा गई। गिरने के दौरान जीप कई बार पलटी, जिससे सवारियां इधर-उधर छिटक गईं।
  • मृतकों की शिनाख्त: हादसे में जान गंवाने वाले तीनों व्यक्ति स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस ने उनके शवों को मोर्चरी में रखवाकर परिजनों को सूचित कर दिया है।

बचाव कार्य और घायलों की स्थिति

हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया:

  1. ग्रामीणों ने बढ़ाया हाथ: पुलिस के पहुँचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने खाई में उतरकर घायलों को बाहर निकालना शुरू कर दिया था।
  2. अस्पताल में भर्ती: घायलों को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ से गंभीर रूप से घायल लोगों को उदयपुर के महाराणा भूपाल (MB) अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
  3. पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कब्जे में लेकर चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज कर लिया है।

पहाड़ी रास्तों पर ‘ओवरलोडिंग’ बनी नासूर

उदयपुर के ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में इस तरह के हादसे बार-बार प्रशासन को आईना दिखा रहे हैं:

  • निजी वाहनों की मनमानी: सार्वजनिक परिवहन (बसों) की कमी के कारण लोग निजी जीपों और क्रूजर वाहनों में भेड़-बकरियों की तरह भरने को मजबूर हैं।
  • पुलिस चेकिंग का अभाव: ग्रामीणों का आरोप है कि इन रूटों पर यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं, लेकिन पुलिस की गश्त और चेकिंग ना के बराबर होती है।
  • खतरनाक ड्राइविंग: संकरे और ढलान वाले रास्तों पर तेज गति से वाहन चलाना इन दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।

निष्कर्ष: सबक लेने की जरूरत

इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि थोड़ी सी लापरवाही और चंद रुपयों के लालच में क्षमता से अधिक सवारी बैठाना जान पर भारी पड़ सकता है। जिला प्रशासन ने घटना पर दुख जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अब देखना होगा कि क्या इस घटना के बाद आरटीओ (RTO) और पुलिस विभाग ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कोई ठोस अभियान चलाते हैं या नहीं।

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