नई दिल्ली/चंडीगढ़: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में इस साल मार्च महीने ने ही जेठ की तपिश का एहसास कराना शुरू कर दिया है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और चंडीगढ़ समेत पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में भीषण गर्मी और ‘लू’ (Heatwave) की गंभीर स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली में मार्च के पहले सप्ताह में ही तापमान 35.7°C तक पहुँच गया, जो पिछले 50 वर्षों में मार्च के शुरुआती दिनों का सबसे उच्चतम स्तर है। गर्मी के इस अचानक हमले ने न केवल रिकॉर्ड तोड़े हैं, बल्कि आम जनजीवन को भी बेहाल कर दिया है।
गर्मी का सितम: मार्च में ही मई जैसा एहसास
आमतौर पर मार्च का महीना खुशनुमा होता है, लेकिन इस बार सूरज के तीखे तेवरों ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है:
- दिल्ली-एनसीआर: सफदरजंग वेधशाला में तापमान सामान्य से 7.3 डिग्री अधिक दर्ज किया गया। दिल्ली के कई इलाकों में पारा 36°C से 38°C के बीच झूल रहा है।
- हरियाणा और चंडीगढ़: हरियाणा के हिसार में तापमान 36.3°C तक जा पहुँचा है, जो सामान्य से काफी अधिक है। चंडीगढ़ में भी दिन का पारा 35°C के पार बना हुआ है।
- रिकॉर्ड तोड़ गर्मी: इससे पहले 5 मार्च 1999 को तापमान 34.8°C दर्ज किया गया था, लेकिन 2026 की इस गर्मी ने पिछले सभी पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है।
क्यों तप रहा है उत्तर भारत? (प्रमुख कारण)
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस असामयिक गर्मी के पीछे कई भौगोलिक और वायुमंडलीय कारक जिम्मेदार हैं:
- पश्चिमी विक्षोभ की कमी: इस साल उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की कमी रही है, जिसके कारण पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बारिश नहीं हुई।
- सूखी पछुआ हवाएं: राजस्थान और पाकिस्तान की ओर से आने वाली गर्म और शुष्क हवाओं ने मैदानी इलाकों के तापमान में अचानक बढ़ोतरी कर दी है।
- एंटी-साइक्लोन सिस्टम: वायुमंडल में बने उच्च दबाव के क्षेत्र के कारण बादल नहीं बन पा रहे हैं, जिससे सूरज की किरणें सीधे धरती को तपा रही हैं।
स्वास्थ्य और कृषि पर मंडराता खतरा
समय से पहले शुरू हुई इस गर्मी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है:
- स्वास्थ्य अलर्ट: डॉक्टरों ने लू से बचने के लिए दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। निर्जलीकरण (Dehydration) और हीट स्ट्रोक के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
- फसलों को नुकसान: गेहूं की फसल इस समय दाना भरने की अवस्था में है। अचानक बढ़ी गर्मी से गेहूं की फसल समय से पहले पक सकती है (Forced Maturity), जिससे उत्पादन और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
- बिजली की मांग: भीषण गर्मी के कारण एयर कंडीशनर और कूलरों का इस्तेमाल बढ़ गया है, जिससे बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ गया है।
राहत की उम्मीद: कब बदलेगा मौसम?
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ राहत मिल सकती है:
- नया विक्षोभ: 14 मार्च 2026 से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है।
- तापमान में गिरावट: इसके प्रभाव से पहाड़ों पर हल्की बर्फबारी और दिल्ली-हरियाणा के कुछ हिस्सों में बादल छाए रहने या हल्की बूंदाबांदी से तापमान में 2 से 4 डिग्री की गिरावट आ सकती है।





