देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में चल रही और आगामी सभी विकास परियोजनाओं की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए ‘थर्ड पार्टी मॉनीटरिंग’ (तीसरे पक्ष द्वारा निगरानी) को अनिवार्य कर दिया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इसी कड़ी में, सिंचाई विभाग ने भी राज्य के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी दी है। विभाग ने आने वाले वर्षों में राज्य के कुल सिंचित क्षेत्र को वर्तमान क्षमता से दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे पहाड़ से लेकर मैदान तक कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है।
थर्ड पार्टी मॉनीटरिंग: जवाबदेही होगी तय
परियोजनाओं की निगरानी के लिए अब केवल विभागीय इंजीनियरों पर निर्भर नहीं रहना होगा:
- पारदर्शिता और गुणवत्ता: स्वतंत्र एजेंसियां अब निर्माण कार्यों की जांच करेंगी, जिससे सामग्री की गुणवत्ता और मानकों के पालन में किसी भी तरह की कोताही की गुंजाइष नहीं रहेगी।
- समय पर पूर्णता: निगरानी के सख्त तंत्र से देरी से चल रही परियोजनाओं की पहचान आसान होगी और संबंधित ठेकेदारों या अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
- लागत में बचत: समय पर काम पूरा होने और बेहतर गुणवत्ता से भविष्य में मरम्मत और रखरखाव पर होने वाले अतिरिक्त खर्च में कमी आएगी।
सिंचाई विभाग का ‘डबल विजन’
राज्य के कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए सिंचाई विभाग ने नई रणनीति तैयार की है:
- सिंचित क्षेत्र का विस्तार: विभाग का लक्ष्य है कि प्रदेश के उन क्षेत्रों तक भी पानी पहुँचाया जाए जो अब तक केवल वर्षा पर निर्भर थे। इसके लिए पुरानी नहरों के सुदृढ़ीकरण और नई योजनाओं पर काम शुरू किया गया है।
- लघु सिंचाई परियोजनाओं पर जोर: पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे-छोटे चेकडैम और लिफ्ट सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाने की योजना है।
- जल संरक्षण: वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के पुनर्जीवन को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता साल भर बनी रहे।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सिंचित क्षेत्र के दोगुना होने से राज्य की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है:
- पलायन पर रोक: जब खेतों को पर्याप्त पानी मिलेगा, तो खेती लाभ का सौदा बनेगी, जिससे युवाओं का रुझान फिर से कृषि की ओर बढ़ेगा और पहाड़ों से होने वाला पलायन रुकेगा।
- फसल विविधीकरण: बेहतर सिंचाई सुविधाओं के कारण किसान अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नकदी फसलों (Cash Crops) और बागवानी के जरिए अपनी आय बढ़ा सकेंगे।
- खाद्य सुरक्षा: सिंचित भूमि बढ़ने से अनाज के उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे राज्य खाद्य सुरक्षा के मामले में और अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।
उत्तराखंड सरकार के ये दोनों निर्णय—परियोजनाओं की निष्पक्ष निगरानी और सिंचाई विस्तार—राज्य के समावेशी विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। जहाँ थर्ड पार्टी मॉनीटरिंग से सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित होगा, वहीं सिंचाई विभाग का यह संकल्प राज्य के अन्नदाताओं की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करेगा। अब मुख्य चुनौती इन योजनाओं को धरातल पर समयबद्ध तरीके से उतारने की है।





