देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य की वृद्ध महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक संरक्षण की दिशा में एक भावुक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में ‘दादी-नानी योजना’ शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्ग महिलाओं को सहारा देना है जो अकेली रह रही हैं या जिनके पास भरण-पोषण का कोई ठोस साधन नहीं है। महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग को इस योजना के लिए एक सुव्यवस्थित नीति (Policy) तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे राज्य की हजारों वृद्ध महिलाओं के जीवन में खुशहाली और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
योजना के मुख्य बिंदु: केवल पेंशन नहीं, ‘सम्मान’ है प्राथमिकता
प्रस्तावित नीति के तहत ‘दादी-नानी योजना’ के स्वरूप को बहुआयामी बनाया जा रहा है:
- आवास और देखभाल: योजना के अंतर्गत बेसहारा वृद्ध महिलाओं के लिए विशेष ‘डे-केयर सेंटर’ और सुरक्षित आवास की व्यवस्था की जाएगी।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: बुजुर्ग महिलाओं के लिए घर पर ही स्वास्थ्य जांच (Home Check-up) और मुफ्त दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रावधान नीति में शामिल होगा।
- सामाजिक जुड़ाव: नीति का एक हिस्सा यह भी होगा कि इन बुजुर्गों के अनुभव का लाभ नई पीढ़ी को मिले, जिसके लिए शिक्षण संस्थानों के साथ उनके संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे।
नीति निर्माण की प्रक्रिया: डेटा बेस होगा तैयार
सरकार इस योजना को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती, इसलिए एक ठोस नीतिगत ढांचा तैयार किया जा रहा है:
- सर्वेक्षण और पहचान: ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर ऐसी महिलाओं का डेटा तैयार किया जाएगा जो ‘दादी-नानी योजना’ की पात्र हैं। इसमें विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
- कानूनी सहायता: नीति में वृद्ध महिलाओं को उनके संपत्ति संबंधी अधिकारों और पारिवारिक विवादों में मुफ्त कानूनी सलाह देने का भी प्रस्ताव है।
- बजटीय प्रावधान: आगामी अनुपूरक बजट में इस योजना के लिए अलग से फंड आवंटित करने की तैयारी है ताकि क्रियान्वयन में देरी न हो।
पलायन के दौर में ‘अकेलेपन’ का इलाज
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन एक बड़ी समस्या है, जिसके कारण गांवों में बुजुर्ग महिलाएं अक्सर अकेली रह जाती हैं।
- साइकोलॉजिकल सपोर्ट: योजना के तहत काउंसलर्स की नियुक्ति की जाएगी जो अकेले रह रहे बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगे।
- डिजिटल साक्षरता: इच्छुक बुजुर्ग महिलाओं को बैंकिंग और आपातकालीन सेवाओं के उपयोग के लिए मोबाइल चलाने का बुनियादी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।





