देहरादून: उत्तराखंड में अभी आधिकारिक तौर पर ‘फायर सीजन’ (वनाग्नि काल) शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन प्रदेश के जंगलों से तबाही की खबरें आने लगी हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में पिछले कुछ दिनों के भीतर वनाग्नि की भीषण घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें अब तक लगभग 42 हेक्टेयर वन संपदा जलकर खाक हो चुकी है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में 56 अलग-अलग स्थानों पर आग लगने के मामले सामने आए हैं। फरवरी माह में ही जंगलों के इस कदर धधकने से वन विभाग और पर्यावरणविदों की चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि मुख्य फायर सीजन (15 फरवरी से 15 जून) की अभी शुरुआत ही हुई है।
कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों में आग का तांडव
वनाग्नि की इन घटनाओं ने राज्य के दोनों प्रमुख मंडलों को अपनी चपेट में लिया है:
- गढ़वाल मंडल: यहाँ के पहाड़ी जिलों में चीड़ के जंगलों में आग तेजी से फैली है। सूखी पत्तियों और तेज हवाओं ने आग को विकराल रूप देने में ईंधन का काम किया।
- कुमाऊं मंडल: नैनीताल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के कुछ इलाकों में आग की घटनाओं से बेशकीमती जड़ी-बूटियों और वन्य जीवों के आवास को भारी नुकसान पहुँचा है।
- नुकसान का विवरण: जले हुए 42 हेक्टेयर क्षेत्र में केवल घास ही नहीं, बल्कि छोटे पौधे और वनस्पति भी पूरी तरह नष्ट हो गई हैं।
समय से पहले आग लगने के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों और वन अधिकारियों ने इस बार जल्दी आग भड़कने के पीछे कई कारण गिनाए हैं:
- शुष्क मौसम और बारिश की कमी: शीतकाल के दौरान उम्मीद के मुताबिक बारिश और बर्फबारी न होने के कारण जंगलों में नमी बेहद कम हो गई है। जमीन पर बिछी चीड़ की सूखी पत्तियां (पिरुल) जरा सी चिंगारी से भड़क रही हैं।
- तापमान में बढ़ोतरी: फरवरी माह में ही तापमान का सामान्य से अधिक होना वनाग्नि की घटनाओं के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहा है।
- मानवीय लापरवाही: कई मामलों में ग्रामीणों द्वारा खेतों की सफाई के लिए जलाई गई आग या सड़क किनारे राहगीरों द्वारा फेंकी गई बीड़ी-सिगरेट के कारण भी जंगल धधक उठे हैं।
वन विभाग की तैयारी: अलर्ट मोड पर प्रशासन
आग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है:
- कंट्रोल रूम सक्रिय: राज्य मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक वनाग्नि कंट्रोल रूम को 24 घंटे अलर्ट पर रखा गया है।
- क्रू स्टेशनों की तैनाती: आग बुझाने के लिए फील्ड स्टाफ और फायर वाचर्स को संवेदनशील बीटों पर तैनात कर दिया गया है।
- जन जागरूकता: विभाग द्वारा ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि वे जंगलों के पास आग न जलाएं और वनाग्नि की सूचना तत्काल नजदीकी वन चौकी को दें।





