अल्मोड़ा/उत्तराखंड। प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। इसी कड़ी में अल्मोड़ा जिले के लगभग 60 गांवों में पेयजल संकट ने हालात बिगाड़ दिए हैं। कई दिनों से पानी की नियमित आपूर्ति ठप होने के कारण ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों में पेयजल योजनाएं या तो बंद पड़ी हैं या फिर बेहद कम दबाव से पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे दैनिक जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें दूर-दराज़ के स्रोतों से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जल संस्थान और संबंधित विभागों की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इससे नाराज होकर लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि क्षेत्र में खराब पड़ी जल योजनाओं की तुरंत मरम्मत की जाए और नियमित निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कई इलाकों में पानी की कमी का कारण स्रोतों का सूखना और पाइपलाइनों की खराब स्थिति है। विभागीय स्तर पर समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कार्य में देरी हो रही है।
उधर, विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में जल स्रोतों का लगातार कम होना और अनियंत्रित दोहन आने वाले समय में स्थिति को और गंभीर बना सकता है। ऐसे में स्थायी जल प्रबंधन नीति की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।
फिलहाल, अल्मोड़ा जिले के इन गांवों में जल संकट को लेकर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और ग्रामीण समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।





